मुठभेड़ में मौत का विरोध, पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन
झांसी। मुठभेड़ में मारे गए पुष्पेंद्र यादव का मामला गरमा गया है। परिजनों ने पुलिस पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराने की मांग करते हुए सोमवार को शव का अंतिम संस्कार नहीं किया। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। पुलिस व प्रशासनिक अफसर दिन भर पुष्पेंद्र के शव के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को मनाते रहे, लेकिन वे नहीं माने। देर शाम पुलिस शव को लेकर झांसी आई। देर रात प्रेमनगर स्थित श्मशान घाट में पुष्पेंद्र के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं, इस मामले को लेकर प्रसपा नेता आदित्य यादव मंगलवार को करगुवां आ रहे हैं। वहीं, सपा नेता अखिलेश यादव बुधवार को आएंगे।
शनिवार की रात मोंठ थाने के प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह चौहान पर करगुवां खुर्द निवासी पुष्पेंद्र यादव और उसके दो साथियों ने हमला कर दिया था। वे प्रभारी निरीक्षक की कार भी लूट ले गए थे। इसके बाद सक्रिय हुई पुलिस का गुरसराय के ग्राम फरीदा में हमलावरों से सामना हो गया था। दोनों ओर से हुई फायरिंग में पुलिस की गोली से पुष्पेंद्र की मौत हो गई थी। रविवार को पुष्पेंद्र का महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम हुआ। इसके बाद से ही तनातनी की स्थिति पैदा हो गई थी।
परिजनों ने मेडिकल के सामने सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया था। उनका कहना था कि पुलिस ने हत्या की है। दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। बड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने मृतक का शव उसके गांव पहुंचाया। लेकिन, यहां परिजनों ने अंतिम संस्कार से हाथ खड़े कर दिए। वे पुलिस कर्मचारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे। इस दौरान गांव में भारी भीड़ भी जमा हो गई। हालत नाजुक होते देख डीएम और एसएसपी भी गांव पहुंच गए। उन्होंने भी परिजनों को समझाने की कोशिश की, परंतु वे नहीं माने। शाम को अपर पुलिस महानिदेशक प्रेमप्रकाश भी मृतक के गांव पहुंच गए। उन्होंने भी परिजनों से वार्ता की, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। बाद में पुलिस शव को झांसी लाई। गांव में तनाव है।