किले के ऐतिहासिक परकोटे के विकास और उसकी उपयोगिता की संभावनाओं को तलाशने के लिए सर्वे कराया जाएगा। यह फैसला शुक्रवार को नगर निगम में हुई स्मार्ट सिटी मिशन योजना की बैठक में लिया गया। इसके अलावा शहर को संवारने के लिए भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
नगर निगम सभागार में हुई बैठक में स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत शहर के स्वरूप को संवारने पर चर्चा हुई। इस दौरान पुराने शहर के इर्दगिर्द बने ऐतिहासिक परकोेटे और उसमें लगे विशाल दरवाजों की खस्ताहाल स्थिति पर चर्चा हुई। बैठक में तय हुआ कि परकोटे के विकास एवं इसकी उपयोगिता की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसके लिए स्मार्ट सिटी योजना के तहत तैनात प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट (पीएमसी) एजेंसी द्वारा तीन माह के भीतर सर्वे किया जाएगा। सर्वे में परकोटे के समानांतर चारों ओर सड़क बनाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। पीएमसी की रिपोर्ट के आधार पर परकोटे का भविष्य तय होगा। इसी क्रम में ऐतिहासिक दरवाजों को भी संवारा जाएगा। पीएमसी अपनी रिपोर्ट तीन माह के भीतर नगर निगम को सौंपेगी।
बैठक में महापौर रामतीर्थ सिंघल, विधायक रवि शर्मा, मंडलायुक्त कुमुदलता श्रीवास्तव, जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी, नगरायुक्त प्रताप सिंह भदौरिया, टाउन प्लानर एन के पुष्कर्णा, स्मार्ट सिटी के नोडल अधिकारी व नगर निगम के अधिशासी अभियंता एके शर्मा मौजूद रहे।
-सत्रहवीं शताब्दी का है परकोटा
झांसी राज्य के पहले मराठा सूबेदार नारोशंकर ने सत्रहवीं शताब्दी के मध्य में झांसी दुर्ग का विस्तार किया था। उन्होंने दुर्ग के समीप की बस्ती को नगर का स्वरूप प्रदान किया था और इसकी सुरक्षा के लिए चारों और परकोटा बनवाया था। परकोटे से नगर में प्रवेश के लिए दस मुख्य गेट हैं, जिन्हें दतिया गेट, उन्नाव गेट, भांडेरी गेट, बड़ागांव गेट, सागर गेट, ओरछा गेट, सैंयर गेट, लक्ष्मी गेट, खंडेराव गेट व झरना गेट के नाम से जाना जाता है। साथ ही नौ छोटे द्वार हैं, जिन्हें खिड़की कहते हैं। इनको सूजे खां खिड़की, भैरो खिड़की, भूरे खां खिड़की, चांद खां खिड़की, गनपत खिड़की, अलीगोल खिड़की, बंगलाघाट खिड़की, झरना खिड़की और सागर खिड़की कहा जाता है।