privet school not follow right to education law
झांसी। वर्तमान शैक्षिक सत्र में दुर्बल आय वर्ग परिवारों के 1178 बच्चों का चयन निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश के लिए हुआ है। लेकिन कई ऐसे स्कूल हैं, जो प्रवेश देने से सीधे कतरा रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में लगभग आधा दर्जन शिकायतें अभिभावकों ने की है।
अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत दुर्बल आय वर्ग परिवारों के बच्चों का हर साल प्राइवेट स्कूलों में निशुल्क प्रवेश एवं पढ़ने के लिए चयन होता है। इन बच्चों को अपने वार्ड के ही निजी स्कूल में प्रवेश मिलने का प्रावधान है। वहीं, शासन प्रवेश लेने वाले संबंधित स्कूलों को प्रत्येक विद्यार्थी की फीस बतौर हर माह लगभग 450 रुपये निर्गत करती है। इसके साथ ही, अभिभावकों के खाते में भी पांच हजार रुपये सालाना देती है। अभिभावक ऑनलाइन एवं ऑफलाइन आवेदन करते हैं। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में बच्चों का चयन लाटरी के माध्यम से होता है। वर्तमान शैक्षिक सत्र में तीन चरण की लाटरी प्रक्रिया के बाद 1178 बच्चों का चयन प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश के लिए हुआ है। लेकिन महानगर के कई छोटे - बडे़ स्कूल कोरोना काल का हवाला देते हुए बच्चों का प्रवेश लेने से कतरा रहे हैं। ऐसे में कुछ अभिभावकों ने विभाग मेें शिकायतें भी की हैं। इस संबंध में प्रभारी बीएसए राजकुमार विश्वकर्मा ने कहा कि स्कूल शासकीय निर्देशों का पालन कर बच्चों का प्रवेश लें। अनुपालन न करने पर उच्चाधिकारियों को जानकारी देते हुए कार्रवाई की जाएगी।