झांसी। हरियाली बिखेरने के लिए लगवाए पौधों को सहेजने में जिले के अफसर नाकाम रहे। आलम यह हुआ कि जिले में पिछले साल लगाए गए करीब 23.60 लाख पौधों में से करीब 50 फीसद पौधे सूख गए हैं। देखरेख के अभाव में तमाम पौधों ने दम तोड़ दिया। वहीं इस बार फिर से पौधरोपण की तैयारी की जा रही है। इस बाद जिले में 49 लाख पौधे लगाए जाने हैं।
जिले को बीते साल पौधरोपण अभियान के तहत 23.60 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया था। जिसमें 9.60 लाख पौधे वन विभाग और 14 लाख पौधे अन्य विभागों ने लगाए थे। आलम यह हुआ कि एक बार पौधे लगाने के बाद विभागों ने मुड़कर पौधों की स्थिति को देखा ही नहीं। इसके चलते करीब 12 लाख पौधे सूखकर मर गए। अधिकारियों का मानना है कि जिले में कई जगहों पर मिट्टी की मोटाई कम है, इसके चलते करीब 20 फीसद पौधे सूख गए। जबकि असामान्य बारिश होने से 10 फीसद पौधों ने दम तोड़ दिया। वहीं 20 फीसद पौधे देखरेख न होने से सूखकर खत्म हो गए। सरकार ने पौधरोपण पर बड़ा बजट खर्च किया था, लेकिन पौधरोपण अभियान पर पानी फिर गया। इस बार फिर से 49.78 लाख पौधे लगाने की तैयारी हो रही है। जिसमें 18.95 लाख पौधे वन विभाग और 20.83 लाख पौधे अन्य विभाग लगाएंगे।
गरिया गांव में अस्सी पौधे भी न बचे
नगर निगम ने गरिया गांव में 20 एकड़ जमीन पर आठ हजार पौधे लगवाने का दावा किया। पड़ताल में सामने आया कि निगम की जमीन पर लगवाए गए आठ हजार पौधों में से 80 पौधे भी नहीं बचे हैं। देखरेख न होने से तमाम पौधे तो बढ़ने के बाद सूख गए। निगम की जमीन पूरी समतल हो गई है। अधिकारियों का तर्क है कि महानगर में पथरीला इलाका होने से पौधे ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रहते। लेकिन पौधों को बचाने के लिए की गई कवायद का अधिकारियों पर कोई जवाब नहीं है। वहीं पॉलिटेकिभनक कॉलेज की जमीन पर लगाए गए पौधे भी सूखकर मर गए।
करोड़ों का बजट हुआ खर्च
जिले में पौधरोपण पर बड़ा बजट खर्च किया गया। नगर निगम ने पौधरोपण और रखरखाव पर 19.63 लाख और जिला योजना से करीब 2.23 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा तमाम विभागों ने अपने स्तर से पौधरोपण में धनराशि व्यय की। कुल मिलाकर मान लिया जाए तो पौधरोपण पर जिले में करीब चार करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन सब कुछ पानी में बह गया।
पिछले साल करीब 60 हजार पौधे लगाए गए थे। जिनकी पूरी जिओ टैगिंग हुई थी। शासन से आई टीम ने भी पौधरोपण की जांच की थी। गरिया गांव में जमीन पथरीली है। इसलिए पौधे कम चल पाते हैं। हर बार करीब 25 फीसद तक पौधे सूख ही जाते हैं। पौधों की स्थिति की जानकारी की जाएगी।
एलएन सिंह, मुख्य अभियंता निर्माण नगर निगम
पिछले साल करीब 23 लाख पौधे लगाए गए थे। जिनका सर्वे भी हुआ है। सत्यापन में सब कुछ ठीक रहा। जिले में मिट्टी की मोटाई कम होने से पौधे मुरझा जाते हैं। वहीं असामान्य बारिश भी इसमें बड़ा कारण है। इस बार 49 लाख पौधे लगवाए जाएंगे।
एके सिंह, वन संरक्षक