नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा प्रदेश में 30 सितंबर पर बालू के खनन पर रोक लगाई गई है, इसके बाद भी बालू आ रही है। कुछ नेता दबाव बनाकर बैक डेट में बालू का स्टाक दिखाने की फिराक में लगे हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही है।
बालू खनन को लेकर एनजीटी बहुत सख्त है। इसी का असर है कि प्रदेश में बालू की कमी चल रही है। बरसात का सीजन मकान निर्माण के लिए बेहतर माना जाता है। पानी की कमी न रहे, इसलिए मकान का निर्माण करने वालों को इस सीजन का इंतजार रहता है। बालू खनन के पट्टे होने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि अब कोई दिक्कत नहीं होगी, लेकिन एनजीटी ने 01 जुलाई से 30 सितंबर तक खनन पर रोक लगा दी, जिससे बालू माफिया सक्रिय हो गए। अब स्थिति यह है कि कुछ नेता बिना रायल्टी के बालू खनन कर रहे हैं और जिला में बालू सप्लाई कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बालू का अवैध खनन रोकने के लिए सरकार प्रयास कर रही है, लेकिन स्थानीय नेता सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इससे जिले में अवैध खनन रुक नहीं पा रहा है। उन्होंने जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायती पत्र पर अवधेश सिंह, रवि श्रीवास्तव, जितेंद्र शर्मा के हस्ताक्षर हैं।
कोट....
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मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखा
मऊरानीपुर मार्ग पर 30 किलोमीटर तक मध्यप्रदेश की सीमा लगती है, जहां से बालू आने की संभावना है। इस पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को चिट्ठी लिखी गई है। प्रदेश के मुख्य सचिव को भी पत्र लिखा गया है। जल्द ही स्पेशल टास्क फोर्स का गठन होगा। मऊरानीपुर क्षेत्र में अवैध खनन कर बालू लाईं सात गाड़ियों को पकड़ा गया है। इन पर लाखों रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। अवैध खनन करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे।
- कर्ण सिंह चौहान
जिलाधिकारी