प्रीमियम पार्किंग व्यवस्था के साथ ठेकेदार की मानमानी भी शुरू हो गई है। पार्किंग ठेकेदार ने जूनियर रेलवे इंस्टीट्यूट के पास सड़क पर खड़ी बसों से भी प्रीमियम के नाम पर किराया वसूल लिया। ऑपरेटर्स ने इसकी शिकायत रेल अफसरों से की है। ठेकेदार इसे सही, जबकि रेल अधिकारी इसे गलत बता रहे हैं।
रेलवे परिसर में आठ नवंबर से प्रीमियम पार्किंग की व्यवस्था शुरू हो गई है। इसके तहत रेलवे परिसर में आने वाले चार पहिया वाहनों से पहले बीस मिनट में कोई चार्ज नहीं लिया जा रहा है। इसके बाद 21 से 30 मिनट तक 50 रुपये, 31 से 59 मिनट तक 100 रुपये, एक घंटे से दो घंटे तक 200 रुपये तथा पहले दो घंटे में दो सौ और इसके बाद तीन सौ रुपये प्रति घंटे लिए जा रहे हैं। मगर, पिछले दो दिनों से सड़क पर खड़ी होेने वाली टूरिस्ट बसों की दो सौ रुपये की रसीद काटे जाने से विवाद की स्थिति बन रही है।
दरअसल, शताब्दी एक्सप्रेस से आने वाले विदेशी पर्यटकों को खजुराहो ले जाने के लिए ट्रेन आने के आधे घंटे पहले जूनियर रेलवे इंस्टीट्यूट के पास सड़क किनारे आकर बसें खड़ी हो जाती हैं। प्रीमियम पार्किंग ठेेकेदार ने दो दिन से टूरिस्ट बसों से भी किराया लेना शुरू कर दिया है। जब बसें सड़क किनारे खड़ी होती है। इस मामले की शिकायत टूरिस्ट ऑपरेटर संजीव दुबे व अन्य ने सीनियर डिवीजन कॉमर्शियल मैनेजर से की है। वहीं, ठेकेदार मोहम्मद तारिक ने बताया कि बसों को खड़ा करने के लिए रेलवे परिसर में इंतजाम किया जा रहा है। बसें कहां खड़ी होगी? यह जवाब उन्होंने नहीं दिया।
‘प्रीमियम पार्किंग का ठेका सिर्फ रेलवे परिसर में खड़े वाहनों के लिए दिया गया है। अगर सड़क पर खड़े वाहनों से किराया वसूला जा रहा है तो यह गलत है।’
दुर्गेश दुबे, सीनियर डिवीजन कॉमर्शियल मैनेजर