फुटपाथों पर रात गुजारने वालों के ‘अच्छे दिन’ आएंगे। उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत मकान बनाकर दिया जाएगा। नगर निगम ने अधिकारियों की टीमें गठित कर उनका सर्वे शुरू करा दिया गया है। सर्वे 26 दिसंबर तक चलेगा।
प्रत्येक बेघर व्यक्ति को आवास देने की मुहिम चल रही है। जिनके पक्के मकान नहीं हैं, उनके फार्म भरवाए जा रहे हैं। पहले चरण में 730 आवासों की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी गई है। अब दूसरे चरण में ऐसे लोगों को लिया जा रहा है, जो फुटपाथ पर रात गुजारते हैं। यानी, ऐसे व्यक्ति जिनके पास न तो अपना कोई मकान है और न ही उनके पास ऐसा आमदनी को कोई जरिया है, जिससे वह अपना मकान बनवा सकें। इसलिए नगर निगम ने ऐसे व्यक्तियों का सर्वे करने का निर्णय लिया है, जो फुटपाथ पर रात गुजारते हैं। इसके लिए नगर निगम के सफाई एवं खाद्य निरीक्षक , कर अधीक्षक, अवर अभियंता समेत अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। तीस अफसरों को दो-दो वार्ड का जिम्मा दिया गया है। सर्वे के लिए पांच गाड़ियां रात में घूमती हैं, जो नौ बजे से लेकर दो बजे तक फुटपाथ पर सोने वाले व्यक्तियों का फोटो, नाम, पता और आधार कार्ड की जांच कर रहे हैं। यह सर्वे 26 दिसंबर तक चलेगा। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राकेश बाबू ने बताया कि सर्वे चल रहा है। जल्द इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
यहां है फुटपाथ पर सोने वालों की अधिकता
फुटपाथ पर सोने वाले ज्यादातर व्यक्ति पंचकुइयां, श्री लक्ष्मी व्यायाम मंदिर की दुकानों में, पंचतंत्र पार्क के बगल में, चित्रा चौराहा के पास, रेलवे स्टेशन के आसपास, सीपरी बाजार में तांगा स्टैंड के आसपास, नगरा हाट के मैदान के किनारे, प्रदर्शनी मैदान पर, बस स्टैंड से लेकर गल्ला मंडी रोड तक व मेडिकल कालेज के सामने सड़क पर रात में सोते हुए अक्सर मिल जाते हैं।
रुक जाते हैं मजदूर भी
सर्वे के दौरान पता चला है कि बहुत से मजदूर आसपास के गांवों के काम की तलाश में यहां आते हैं। कई बार यदि मजदूरों को काम नहीं मिलता है या दो से चार दिन का काम मिल जाता है तो मजदूर पैसा बचाने के चक्कर में गांव नहीं जाते और शहर में ही रुक जाते हैं। ये मजदूर ज्यादातर सड़क किनारे फुटपाथ के सहारे रात बिताते हैं। सर्वे करने वाली टीमें मजदूरों का पूरा ब्योरा जुटा रही हैं। आधार कार्ड से इनकी पहचान की जा रही है।