झांसी। प्रधानमंत्री ग्राम विकास योजना के तहत पूरे जनपद में करीब दो वर्ष पहले जोर-शोर से विभिन्न ब्लॉकों के कुल 44 गांव चिन्ह्नित हुए। दो करोड़ रुपये से इन गांवों में काम कराया जाना था लेकिन, इनमें से किसी भी गांव में अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है। तमाम लिखा-पढ़ी के बाद अब तक सिर्फ एक गांव के लिए ही साढ़े नौ लाख रुपये स्वीकृत किए गए।
केंद्र सरकार ने इस महत्वकांक्षी योजना के जरिए प्रत्येक चयनित गांव में हर तरह की सुविधा देने की योजना बनाई थी। इन गांव के भीतर ही आवागमन, संचार, स्वास्थ्य से लेकर रोजगार तक की सहुलियत ग्रामीणों को दी जानी थी। सरकार की योजना था कि ऐसा करके गांवों से शहरों की ओर हो रहे पलायन को काफी तक रोका जाए। बुंदेलखंड में पलायन की समस्या को देखते हुए इस योजना को यहां ज्यादा तरजीह मिलने की संभावना जताई जा रही थी। वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री आर्दश ग्राम योजना की शुरूआत की। इसके लिए सभी ब्लॉकों में गांवों का सर्वे कराया गया। सर्वे के सभी ब्लॉकों से आठ गांव चुने गए। इसके बाद यहां पहली किस्त दो करोड़ रुपये से कराए जाने वाले कार्यों के प्रस्ताव भी तैयार करा लिए गए। विधायकों की ओर से भी प्रस्ताव स्वीकृत हो गए। सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सितंबर महीने में जिला समाज कल्याण अधिकारी(विकास) की ओर से प्रस्ताव भेज दिया गया। उम्मीद जताई जा रही थी कि वित्तीय वर्ष के भीतर ही अच्छी-खासी धनराशि स्वीकृत हो जाएगी लेकिन, वित्तीय वर्ष खत्म होने तक सिर्फ मऊरानीपुर ब्लॉक के स्यावरी ग्राम में कार्य के लिए सिर्फ 9.50 लाख रुपये ही जारी हुए।
इनसेट
इन गांवों का हुआ था चयन
योजना के अंतर्गत मऊरानीपुर ब्लॉक से देवरीघाट, पंचमपुरा, हरपुरा, खरकासानी। गुरसराय से लुहरगांव, भगवंतपुरा, मथनिया, दुगारा, इटौरा, जलालपुरा, मैगांव। मोंठ से महुआखेरा, सजोखरी, दसना, बरथरी, बहादुरपुर, कनौचा, कंदौर। चिरगांव से इटवां, पुरानांद, खिल्ला, खोह, भरौल, इटौरा, मोडखुर्द, सितौरा। बामौर ब्लॉक से खिरियावाट, गेंदा कबूला, इंदी, वेंदा, विलाटीकरके, नगारा। बंगरा ब्लॉक से अतपेई, स्यावनीबुजुर्ग, दरबटयाऊ, अमनपुरा, सनौरा, ढह़पुरा, चिरकना, नराईच। बड़ागांव ब्लॉक से मुस्तरा, लक्ष्मनपुरा, रौनीजा एवं आरी।