झांसी। शासन ने कुक्कुट कॉमर्शियल लेयर योजना में बदलाव कर दिया है। एक करोड़ अस्सी लाख की इस योजना को अब 70 लाख का कर दिया गया है। बड़ी योजना होने के कारण इसका लाभ अभी तक जिले में सिर्फ एक व्यक्ति को ही मिल सका है। प्रोजेक्ट छोटा होने के बाद इसके लाभार्थियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
बुंदेलखंड में कुक्कुट पालन को लघु उद्योग के तौर पर स्थापित करने के लिए शासन ने कुक्कुट विकास नीति 2013 में बदलाव कर दिया है। अभी तक इस नीति के तहत तीस हजार मुर्गियां पालने के लिए एक करोड़ अस्सी लाख रुपये का प्रोजेक्ट लगाया जाता था। इतने बड़े प्रोजेक्ट का लाभ जिले के मुर्गी पालक नहीं ले पा रहे थे।
स्थिति यह है कि इस योजना के तहत अभी तक जिले में एक मात्र इकाई ही स्थापित हो सकी है। शासन ने अब इस बड़े प्रोजेक्ट में बदलाव करते हुए दस हजार मुर्गियां पालने की नई योजना तैयार की है। यह योजना 70 लाख रुपये की होगी। इस योजना में 21 लाख रुपये खुद आवेदक को लगाने होंगे तथा 49 लाख रुपये पशु पालन विभाग की संस्तुति पर बैंक से लोन के तौर पर मिलेगा।
प्रोजेक्ट के लिए उन्हीं लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो पहले से मुर्गी पालन कर रहे हों। एक व्यक्ति दो इकाइयों का संचालन कर सकता है। इस योजना में विदेश में रहने वाले भारतीय, अन्य प्रदेशों में रहने वाले लोग ग्रुप या कंपनी के रूप में आवेदन कर लाभ ले सकते हैं। प्रोजेक्ट के लिए जरूरी जमीन आवेदक के पास होनी चाहिए।
यह होंगे लाभ
कुक्कुट पालन के लिए लाभार्थी को एक एकड़ तक जमीन खरीदने पर स्टांप ड्यूटी नहीं देनी होगी। कुक्कुट उत्पादन आहार इनग्रेडिएंटस के लिए प्रदेश में इंट्री टैक्स नहीं लिया जाएगा।