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आरटीई : निजी स्कूल नहीं चाहते गरीब बच्चों को मिले प्रवेश

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झांसी। सरकार गरीब और आरक्षित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने के लिए कवायदें कर रही है। लेकिन मंडल के निजी स्कूल अपने विद्यालय में गरीब बच्चों को दाखिला देने के पक्ष में नहीं हैं। आलम यह है कि निशुल्क शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत मंडल में अब तक 2593 में से महज 154 स्कूलों ने ही ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। जबकि आरटीई के तहत ऑनलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। ऐसे में अभिभावकों को आवेदन करने में दिक्कत हो रही है।
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देश में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया है। इसके तहत गरीब और आरक्षित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों की 25 फीसदी सीटों पर निशुल्क प्रवेश दिया जाता है। प्रवेश के बाद सरकार की ओर से स्कूलों को फीस का भुगतान किया जाता है। बावजूद इसके स्कूल पंजीकरण में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसे लेकर पिछले दिनों महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने बैठक में आरटीई पोर्टल की स्थिति को देखा। जिसमें सामने आया कि मंडल में 2593 स्कूलों में से महज 154 स्कूल ही पंजीकृत हो सके हैं। उन्होंने नाराजगी जताते हुए सभी स्कूलों का पंजीकरण कराने के निर्देश दिए हैं। इसे लेकर सहायक निदेशक बेसिक शिक्षा जीएस राजपूत ने मंडल के तीनों जिलों के बीएसए को स्कूलों का पंजीकरण कराने के निर्देश दिए हैं।
आवेदनों का दौर हुआ शुरू
निशुल्क शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदनों का दौर चल रहा है। पहले चरण की आवेदन प्रक्रिया 25 मार्च तक चलेगी। इसके बाद बीएसए 26 से 28 मार्च तक आवेदनों का सत्यापन करेंगे। साथ ही 30 मार्च को दाखिले के लिए लॉटरी निकाली जाएगी और पांच अप्रैल तक बच्चों को दाखिला दिलाया जाएगा। दूसरे चरण की आवेदन प्रक्रिया एक अप्रैल से 23 अप्रैल तक चलेगी।
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