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हॉरर फिल्म के भूतिया खंडहर जैसे हैं पॉलीटेक्निक के छात्रावास

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पॉलीटेक्निक हॉस्टल में के बाहर तैनात पुलिस।
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झांसी। पॉलीटेक्निक के ब्वॉयज हॉस्टल किसी हॉरर फिल्म के भूतिया खंडहर से कम नहीं हैं। छात्रावासों की दीवारें जीर्णशीर्ण हैं और खिड़की-दरवाजे क्षतिग्रस्त। इमारतों के इर्दगिर्द झाड़ियां ही झाड़ियां हैं। शाम होते ही छात्रावास परिसर अंधेरे के आगोश में समा जाता है। ऐसे माहौल में होने वाली पढ़ाई का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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पॉलीटेक्निक में दो ब्वॉयज हॉस्टल हैं। दोनों परिसर में एकेडेमिक भवन के पीछे स्थित हैं। एक हास्टल में 50 और दूसरे में 60 छात्रों के रहने की व्यवस्था है। जिस हॉस्टल में बेटी के साथ दुष्कर्म हुआ, उसका लोकार्पण साल 2014 में हुआ था। परिसर में झाड़ियां इस कदर हावी हैं कि हास्टल की इमारत तक पहुंचने के लिए पगडंडी नुमा रास्ते से जाना पड़ता है। इमारत की दीवारें सालों से पुताई न होने की वजह से और भी बदहाल नजर आती हैं। खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं। दरवाजों को बंद करने में टूटी कुंडिया आड़े आ जाती हैं। परिसर में प्रकाश का भी कोई इंतजाम नहीं है। खंभे तो लगे हैं, परंतु लाइट गायब हैं। ऐसे में शाम से ही छात्रावास परिसर को अंधेरा अपने आगोश में ले लेता है। छात्रावासों की बदहाली पर प्रधानाचार्य नवीन कुमार ने कहा कि बारिश की वजह से झाड़ियां उग आईं हैं। जल्द इन्हें साफ कराया जाएगा। इसके अलावा छात्रावासों की अन्य खामियां भी दूर की जाएंगी।
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