झांसी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने जनता से दूर रहने वाले व विकास कार्यों में रुचि न लेने वाले बुंदेलखंड के विधायकों का रिपोर्ट कार्ड बनाना शुरू कर दिया है। 19 में से 14 विधायक ऐसे हैं, जिनका काम संतोषजनक नहीं है। इनको चेताया भी जा चुका है, लेकिन उनकी कार्यशैली में कोई अंतर नहीं आया है। ऐसे में एक बार फिर सभी विधायकों की गोपनीय रिपोर्ट तैयार की जा रही है। गांव-गांव, मुहल्लों- मुहल्लों से रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अगर वक्त रहते जनप्रतिनिधि नहीं चेते तो उनका टिकट कटना तय है।
बुंदेलखंड की जनता ने 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सभी 19 विधायक चुन कर दिए थे। इनमें कई ऐसे भी थे, जिनकी जीत पर पार्टी को संशय था, लेकिन वे भी मोदी लहर में जीत गए। जनता को उम्मीद थी कि अब उनकी समस्याओं को जनप्रतिनिधि जरूर प्राथमिकता पर सुनेंगे। शुरुआत में जनता की समस्याओं को दूर करने के लिए विधायकों ने बड़े- बड़े वादे किए। जनता से मिलने के लिए समाधान कार्यालय खोल दिए, मगर अब हाल यह है कि कई विधायकों से पीड़ित मिल भी नहीं पा रहे हैं। समाधान कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहता है।
अधिकांश विकास की योजनाएं भी बेहद धीमी गति से चल रही हैं, जिन पर जनप्रतिनिधि आवाज तक नहीं उठा रहे हैं। पुलिस, बिजली, पानी जैसे अहम विभागों में लोग काम कराने के लिए परेशान हो रहे हैं। इसे देखते हुए संघ सक्रिय है। संघ के पदाधिकारियों, स्वयं सेवकों ने अलग- अलग वर्ग में बैठकर विधायकों के कामों की रिपोर्ट लेनी शुरू कर दी है। पूरी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
मुख्यमंत्री हर तीन माह में ले रहे फीड बैक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर तीन माह में अपने विधायकों के कामकाज की रिपोर्ट ले रहे हैँ। संघ के पदाधिकारियों ने विधायकों के कामकाज पर काफी आपत्ति जताई है। जानकारों का कहना है कि यही कारण रहा कि बुंदेलखंड से ऐसा कोई विधायक सामने नहीं आ पाया जिसे मंत्री पद से नवाजा जाता। विधायकों की लगातार लापरवाही को देखते हुए अब उनकी पूरी रिपोर्ट तैयार हो रही है।