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चार लोगों की हत्या के मामले में पुलिस के हाथ खाली

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police emptyhanded in four murder case
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चार लोगों की हत्या के मामले में पुलिस के हाथ खाली
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झांसी। सीपरी बाजार थाना इलाके में सोमवार - मंगलवार की दरम्यानी रात रहस्यमय हालातों में हुई एक परिवार के चार लोगों की मौत के मामले में पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। मृतक के भाई की तहरीर पर हत्या का मुकदमा जरूर दर्ज किया जा चुका है, लेकिन पुलिस की सुई आग से हुई मौत पर ही अटकी हुई है।
सीपरी बाजार क्षेत्र के लहर की माता मंदिर के पास स्थित दयाराम कॉलोनी में सोमवार- मंगलवार की दरम्यानी रात जगदीश उदैनिया (51), उनकी मां कुमुद (72), पत्नी रजनी (45) व बेटी मुस्कान (19) की सोते समय जलाकर हत्या कर दी गई थी। चारों एक ही कमरे में सो रहे थे। जबकि, पिता जुगल किशोर उदैनिया बगल में बने मंदिर वाले कमरे और जगदीश के छोटे भाई दीपक उदैनिया पत्नी व बच्चों के साथ घर के ऊपरी हिस्से में बने कमरे में सो रहे थे। जिस वक्त वह जागे घर के नीचे के हिस्से से धुआं और आग की लपटे उठ रहीं थीं। पड़ोसियों की मदद से वह परिवार समेत सीढ़ी से उतरकर बाहर आ सके थे। आग बुझने से पहले ही उक्त चारों की जलकर दुखद मौत हो चुकी थी। सीपरी बाजार पुलिस ने भाई दीपक की तहरीर पर अज्ञात बदमाशों के खिलाफ लूट के उद्देश्य से आग से जलाकर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था।
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शहर के भीतर घनी आबादी के बीचों बीच हुई जघन्य घटना के दो दिन बाद भी पुलिस बदमाशों तक नहीं पहुंच पाई है। पुलिस के हाथ खाली ही बने हुए हैं। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।
उधर, पुलिस की सुई आग से जलने से हुई मौत पर ही अटकी हुई है। एसएसपी डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चारों शवों पर चोट के कोई निशान नहीं पाए गए हैं, जिससे उनकी मौत हो जाए। रिपोर्ट में जलने से ही मौत का कारण सामने आया है। अभी तक ही परिस्थितियां आग लगने से ही मौत की तरफ इशारा कर रही हैं। अभियोग हमने पंजीकृत कर लिया है। अगर किसी के पास कोई साक्ष्य हो तो वह पुलिस को उपलब्ध करा सकते हैं। साक्ष्य का परीक्षण करने के बाद उसी हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।
मृतकों के शरीर पर थे चोट के गहरे निशान
झांसी। चार लोगों की हत्या को पुलिस शुरू से ही आग से हुई मौत मान रही है। अब भी पुलिस का यही कहना है। लेकिन, पुलिस की इस बात को मृतक के भाई दीपक उदैनिया ने सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि बदमाशों ने पहले उनके परिजनों के साथ मारपीट की और उसके बाद सुबूत साफ करने के उद्देश्य से आग लगा दी।
दीपक ने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान शवों के इर्दगिर्द उनके परिजन मौजूद थे। इस दौरान सभी के शरीर पर चोटों के निशान पाए गए। खासतौर पर भाई जगदीश और भतीजी मुस्कान के सिर पर गंभीर चोट के निशान देखने को मिले। अगर आग लगने से मौत हुई है, तो शरीर पर ये चोट के निशान कैसे आए? दीपक ने आरोप लगाया कि बदमाश लूट के इरादे से घर में दाखिल हुए थे। इसमें नाकामयाब होने पर उन्होंने उक्त घटना को अंजाम दिया। पहले परिजनों से मारपीट की गई और उसके बाद घर में आग लगा दी गई। उनका ये भी अनुमान है कि कमरे में बाहर से लगे कूलर के जरिये बेहोशी की दवा डाली गई। इसके बाद दुकान का शटर तोड़कर बदमाश कमरे में दाखिल हुए। पहचान छुपाने के लिए उन्होंने कमरे में मौजूद चारों लोगों की हत्या कर दी। उन्होंने पुलिस - प्रशासन से इंसाफ की गुहार लगाई।
ये लगाए जा रहे कयास
घटना को लेकर लोग तरह- तरह के कयास लगा रहे हैं। पुलिस भी उसी दिशा में काम कर रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि हत्यारों ने पहले खिड़की पर रखे कूलर में नशीला केमिकल डाला होगा। केमिकल के कमरे में हवा के साथ उड़ने पर वह चारों लोग बेहोश हो गए होंगे। इसके बाद किसी परिपक्व बदमाश ने शटर के बीच के हिस्से को बाहर निकाला होगा। शटर के खुलते ही वह दुकान के अंदर जाने वाले गेट से कमरे में पहुंच गए होंगे। कमरे में पहुंचने के बाद बदमाशों ने लूटपाट की कोशिश की होगी। इसी बीच चारों में किसी न किसी के जागने पर उन्होंने एक- एक कर उनकी हत्या कर दी होगी और सबूत मिटाने के लिए कमरे में आग लगा दी होगी। वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश आराम से भाग गए। कमरे में धुआं होने पर मुस्कान को जरूर होश आया होगा और उसने चप्पल पहनकर कमरे से निकलने की कोशिश की, क्योंकि उसके एक पैर में चप्पल मिली थी।
क्या कॉलोनी में ही मौजूद थे हत्यारे
लहर की माता मंदिर मार्ग पर दयाराम कालॉनी के पहले मुख्य सड़क पर खुले एक मॉल और करीब सौ मीटर दूर स्थित मंदिर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच में पाया कि रात डेढ़ बजे से दो बजे के बीच एक कार, दो बाइक और एक ऑटो मौके से गुजरी थी। जो मॉल की तरफ से गुजरती हुई सीधा मंदिर से आगे बढ़ गई। कॉलोनी की तरफ कोई गाड़ी नहीं मुड़ी। इससे लग रहा है कि वारदात को अंजाम देने वाले कॉलोनी में ही पहले से मौजूद थे।
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पिता कुछ भी कहने में असमर्थ
घटना के वक्त पीड़ित परिवार के मुखिया जुगल किशोर उदैनिया घर के मंदिर वाले कमरे में सो रहे थे। आग बुझने के बाद वह कमरे में अचेत हालत में मिल थे, उनके चेहरे पर रगड़ खाने के निशान थे। नाक पर चोट भी लग रही थी। उनको रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया। मगर, वह कुछ भी बता पाने में असमर्थ हैं। परिजनों ने उनको अभी घटना के बारे में कुछ नहीं बताया है। वह बार- बार बेटे जगदीश के बारे में पूछ रहे हैं। मंगलवार को एक टीम भी उनके बयान दर्ज करने गई थी, लेकिन उनकी हालत देखकर उसे वापस लौटना पड़ा।
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