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प्लाज्मा दान करने के लिए बढ़ने लगे कदम

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झांसी। कोविड को मात दे चुके कई लोगों ने प्लाज्मा दान करने के लिए कदम बढ़ाया है। उनका कहना है कि कोरोना से दूसरों की जान बचाने के लिए वह अपना प्लाज्मा देंगे। निर्धारित समय पूरा होते ही वह प्लाज्मा डोनेट करने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन से संपर्क करेंगे।
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देश भर में प्लाज्मा थेरेपी के काफी सकारात्मक परिणाम सामने आ चुके हैं। झांसी में भी मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाया गया है, जिसके बाद उनकी सेहत में सुधार हुआ है। हालांकि, प्लाज्मा दान करने वाले लोगों की संख्या काफी कम है। ऐसे में अमर उजाला ने लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चला दिया है। लगातार खबरें प्रकाशित कर कोरोना को मात दे चुके लोगों से प्लाज्मा दान करने की अपील की जा रही है। अब कई लोगों ने प्लाज्मा दान करने में सहमति जता दी है। इसमें कोरोना संक्रमित हो चुके डॉक्टर भी शामिल हैं।
साथ ही, भाजपा ग्रामीण जिलाध्यक्ष भी कोरोना से ठीक होकर अपने घर आ चुके हैं। उन्होंने भी सहमति जताई है कि अगर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर उनसे प्लाज्मा दान करने के लिए संपर्क करते हैं तो वह जनहित में जरूर डोनेट करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि उनके प्लाज्मा दान करने से किसी की जान बच जाती है तो इससे बड़ी सौभाग्य की बात कोई नहीं होगी। इसके अलावा भी कुछ सरकारी अथवा निजी विभाग के कर्मचारी व अन्य लोगों ने भी प्लाज्मा डोनेट करने पर सहमति जता दी है।
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कब डोनेट कर सकते प्लाज्मा
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आने के 14 दिन बाद या फिर रिपोर्ट पॉजिटिव आने के 28 दिन बाद कोई भी व्यक्ति प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। प्लाज्मा दान करने के पहले यह भी जांच की जाती है कि व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडी बनी है या नहीं।
ये भी ध्यान दें
- प्लाज्मा दान करने के बाद कोई कमजोरी नहीं आती है।
- यह रक्त का एक कंपोनेंट है। इससे खून की कमी नहीं होती।
- डोनेट नहीं करेंगे तो एंटीबॉडी कुछ समय बाद अपने आप खत्म हो जाएगी।
मेडिकल कॉलेज में अब तक चार लोग प्लाज्मा डोनेट कर चुके हैं। हालांकि, यह संख्या कम है। हमारी अपील है कि कोविड से जंग जीत चुके ज्यादा से ज्यादा लोग प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आएं।
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- डॉ. एनएस सेंगर, उप प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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