बिजौली में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना (प्लांट ) का औपचारिक शुभारंभ चार महीने पहले हो गया था, लेकिन अब तक प्लांट शुरू नहीं हो सका है। पहले बिजली कनेक्शन नहीं मिलने की वजह से कार्य लटका था, अब शेड नहीं बन पाने की वजह से मामला अटका पड़ा है। इससे स्वच्छ भारत मिशन रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है।
महानगर से प्रतिदिन लगभग 300 टन कचरा निकलता है। इसमें 17 से लेकर 25 प्रतिशत तक प्लास्टिक कचरा होता है। इस प्लास्टिक के कचरे से 11 प्रतिशत बेकार हो जाता है, जबकि बाकी कचरे को कबाड़ी बेच दिया जाता है। बेकार हो जाने वाला कचरा फेंक दिया जाता है, जो नालियों में फंसने के बाद नालियों को चोक कर देता है। यही नहीं, पालीथिन में खाद्य सामग्री भरकर फेंकने से जानवर इस कचरे को मय पालीथिन के खा जाते हैं। यह कचरा उनके पेट में फंस जाता है और बेवजह उनकी मौत हो जाती है। इस कचरे का सही इस्तेमाल करने के लिए बिजौली में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाया गया है। झांसी देश का इकलौता शहर है, जहां इस तरह का प्लांट लगाया गया है। इस प्लांट का औपचारिक शुभारंभ 15 अगस्त को महापौर किरण वर्मा ने कर दिया था तथा आश्वासन दिया था कि दो अक्तूबर को प्लांट शुरू हो जाएगा।
लेकिन, यह प्लांट अब तक शुरू नहीं हो सका है। इसकी वजह ठेकेदार द्वारा कचरा प्लांट के लिए शेड नहीं बनाना है। इस कारण काम में देरी हो रही है। जबकि, पहले बिजली कनेक्शन न होने से प्लांट की शुरुआत नहीं हो पा रही थी।
तीस कबाड़ियों ने शुरू किया काम
तीस कबाड़ियों ने प्लास्टिक कचरा खरीदना शुरू कर दिया है। बिजली का कनेक्शन मिल गया है, अब शेड बनने का इंतजार किया जा रहा है। शेड बनते ही प्लांट काम करना शुरू कर देगा।
- राकेश सोलंकी
आर आर कलेक्टिव कंपनी
ठेकेदार को नोटिस
अभी सफाई कर्मियों के इंटरव्यू चल रहे हैं। इस कारण अन्य कामों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। लेकिन, ठेकेदार को नोटिस दिया गया है। जल्द ही काम शुरू हो जाएगा।
- आर के वर्मा
मुख्य अभियंता