झांसी। कोरोना को मात दे चुके लोगों के हाथों में अब दो जिंदगियों को बचाने का मौका है। एक बार प्लाज्मा को कोविड के दो गंभीर रोगियों को चढ़ाया जा सकता है। प्लाज्मा दान करने से किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होती है। ऐसे में अमर उजाला कोविड से ठीक होने वाले मरीजों से अपील करता है कि प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आएं।
विदेशों के बाद भारत में भी प्लाज्मा थेरेपी के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद आईसीएमआर ने इसको मंजूरी दे दी है। इस थेरेपी को कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कोविड से ठीक हो चुके जो लोग अपना प्लाज्मा दान करते हैं, उसमें एंटीबॉडी होती है। फिर यह प्लाज्मा जब किसी मरीज को चढ़ाया जाता है, तो एंटीबॉडी रोगी के शरीर में पहुंचकर वायरस से लड़ने लगती है। इससे मरीज की सेहत में सुधार होने लगता है। चूंकि, इस प्लाज्मा को बनाया नहीं जा सकता है, इसे सिर्फ कोविड से ठीक होने वाले व्यक्तियों से दान में लिया जा सकता है। ऐसे में अब कोरोना को हराकर लौट आए लोगों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। झांसी में कोरोना को मात देकर अब तक 2283 लोग ठीक हो चुके हैं। जबकि, मौजूदा समय में 17 कोरोना पॉजिटिव गंभीर मरीज जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। इनमें से कुछ को प्लाज्मा थेरेपी की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए अमर उजाला अपील करता है कि कोविड की वैक्सीन अभी तक बाजार में नहीं आई है। आपका प्लाज्मा ही किसी मरीज के लिए दवा का काम कर सकता है। प्लाज्मा दान करने से कुछ नुकसान नहीं होता है। ऐसे में किसी और व्यक्ति की जान कोरोना से न चली जाए, इसलिए अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए प्लाज्मा को दान करें।
अब तक सिर्फ तीन ने ही किया दान
दो हजार से ज्यादा मरीज कोरोना से ठीक हो चुके हैं लेकिन सिर्फ तीन लोगों ने ही अपना प्लाज्मा दान किया है। यह आंकड़ा तो बेहद कम है। आपकी तो जान बच गई है लेकिन किसी परिवार का कोई और व्यक्ति कोरोना से अपनी जा न गवां दे, इसलिए मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त मात्रा में प्लाज्मा की उपलब्धता होना जरूरी है।