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जीएसटी को मुंह चिढ़ा रही सादा पैकिंग

Thu, 13 Jul 2017 12:51 AM IST
amarujala
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gst jhansi news - फोटो : demo
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झांसी।
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पैक्ड और ब्रांडेड खाद्य पदार्थ जीएसटी के दायरे में आने के बाद कम प्रचलित कंपनियों ने सादा पैकिंग में अपना माल बाजार में उतारा है। पहले रंगीन और डिजाइनर पैकिंग में आने वाला माल अब सादा पैकिंग में लाकर इन कंपनियों ने खुद को जीएसटी से बचाने की कोशिश की है।
बाजार में सबसे अधिक खाद्य पदार्थों की बिक्री होती हैं, इसलिए नामी कंपनियों के अलावा झांसी समेत प्रदेश के अन्य महानगरों में संचालित लोकल स्तर भी कई कारोबारियों का माल भी बाजार में आता है। अपने माल को प्रचलन में लाने के लिए कारोबारी बेहतर पैकिंग कर उसे ब्रांडेड के तौर पर पेश करते हैं। दुकानदार भी अधिक मुनाफा कमाने के लिए लोकल कारोबारियों का माल रखना पसंद करते हैं।
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जीएसटी में सभी तरह के पैक्ड ब्रांडेड खाद्य पदार्थों पर टैक्स लगने से छोटे कारोबारियों ने सादा पैकिंग में माल बेचने शुरू कर दिया है। सुभाष गंज के दुकानदारों ने बताया कि प्रदेश के बडे़ महानगरों की फ्लोर मिल और कई छोटी कंपनियों ने सादा पैकिंग में खाद्य पदार्थ भेज रही हैं।

इन पर लगा टैक्स
ब्रांडेड खाद्यान्न (आटा, चना, मैदा, सूजी, बेसन जैसी खाद्य सामग्री), चीनी, चायपत्ती, कॉफी के भुने दाने, खाद्य तेल, स्किम्ड दूध पाउडर, शिशुओं के लिए दूध का आहार, पैक्ड पनीर, काजू, किशमिश, पीडीएस केरोसिन, घरेलू केरोसिन, घरेलू एलपीजी, जूते-चप्पल, कपड़े, अगरबत्ती, कॉयर मैट, मक्खन, घी, बादाम, फ्रूट जूस, पैक्ड नारियल पानी, अचार, मुरब्बा, चटनी जैम, जैली छाता, मोबाइल, केश तेल, टूथपेस्ट, साबुन, पास्ता, कॉर्न फ्लैक्स, सूप, आइसक्रीम जैसी वस्तुओं को शामिल किया गया है। 
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‘नामी ब्रांडेड कंपनियां कभी ऐसा नहीं करेगी, क्योंकि इससे उनका मार्केट गिर जाएगा। दूसरा, लोगों का विश्वास भी हट जाएगा। फिलहाल अभी जीएसटी को बाजार में गति देने का काम चल रहा है। सामान्य स्थिति होने पर ही ऐसे मामलों से निपटा जाएगा।’
डॉ. विमल कुमार, डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर।
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