झांसी। पितृ पक्ष आज मंगलवार से शुरू हो जाएंगे। लोग अपने पूर्वजों का स्मरण कर उनका जल तर्पण और श्राद्ध करेंगे। वहीं, कई स्थानों पर पितृ पक्ष 2 सितंबर से प्रारंभ होगा। पितृपक्ष के दौरान कोई भी शुभ मांगलिक कार्य पर रोक रहेगी। हालांकि महालक्ष्मी पर्व पर शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है। पितृ पक्ष में श्राद्ध करना और तर्पण देना आवश्यक रहता है। पंचांगों के अनुसार पितृ पक्ष का प्रारंभ पूर्णिमा से और समापन अमावस्या पर होता है। ज्योतिषविद डॉ. नाथूराम पांडे के अनुसार मंगलवार को पूर्णिमा की तिथि सुबह 9:30 बजे के बाद प्रारंभ हो जाएगी। पूर्वजों का श्राद्ध दोपहर 12 बजे के बाद होता है। आमतौर पर पितृपक्ष 16 दिन का होता है लेकिन इस बार यह 17 दिन का होगा। आचार्य शांतनु पांडे के अनुसार माह की जिस तिथि को पितरों की मृत्यु होती है। उसी तिथि में श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। अगर तिथि ज्ञात न हो तो पितृ पक्ष की अमावस्या पर श्राद्ध व तर्पण करें। आसपास जलाशय के न होने पर तर्पण घर से भी किया जा सकता है। इधर, गायत्री परिवार शक्ति पीठ के मीडिया प्रभारी संजीव खरे ने बताया कि गायत्री शक्तिपीठ पर 2 सितंबर से सुबह 5:30 बजे से लोग सोशल डिस्टेंसिंग के बीच श्राद्ध एवं तर्पण करेंगे।
महालक्ष्मी पर्व पर करें शुभ कार्य
पितृपक्ष में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कोई भी मांगलिक शुभ कार्य नहीं किया जाता है। हालांकि पितृ पक्ष में महालक्ष्मी पर्व पर समस्त शुभ कार्यों को किया जा सकता है। यह पर्व 10 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन कोई भी नई वस्तु खरीदी जा सकती है।
कई ने मनाई अनंत चतुर्दशी, आज भी मनाएंगे
महानगर में आज कई श्रद्धालुओं ने अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया। भगवान गणेश की प्रतिमाओं को भक्ति भाव के साथ जल में विसर्जित किया। वहीं, घरों में श्रद्धालुओं ने अनंत की पूजा की। यह त्योहार कई श्रद्धालु मंगलवार को भी मनाएंगे।
कहीं गंदगी, कहीं जलकुंभी
पितृ पक्ष के दौरान जल तर्पण के लिए लक्ष्मी तालाब और पानी वाली धर्मशाला से कई जलाशयों पर लोग उमड़ते हैं। लेकिन इस बार लोगों को काफी निराशा हाथ लगेगी। लक्ष्मी तालाब पर जहां नाले का गंदा पानी बह रहा है और तालाब का पानी पूरी तरह से सूखा पड़ा है। वहीं, पानी वाली धर्मशाला पर जलकुंभी भी पूरी तरह से फैली हुई है।