झांसी। पुलिया के खुले मेनहोल में गिरने से हुई राकेश कुशवाहा की मौत से नगर निगम के दावों की पोल खुल गई है। बारिश से निपटने के इंतजाम ही नहीं किए गए। अभी भी कई मेनहोलों पर ढक्कन नहीं है।
नगर निगम की जिम्मेदारी है कि बरसात से पूर्व नालों की सफाई कराई जाए, खुले मेनहोलों पर ढक्कन लगवाए जाए, सड़कों पर पैचवर्क करवाया जाए, स्ट्रीट लाइटें दुरुस्त करवाई जाएं और गड्ढों को भरवाया जाए, ताकि कोई हादसा नहीं हो।
हकीकत तो यह है कि कई बड़े नाले साफ ही नहीं हुए, कई सड़कों पर गड्ढे हैं, कई जगह स्ट्रीट लाइटें बंद हैं और मेनहोल खुले पड़े हैं। नगर निगम का तर्क है कि ठेकेदारों ने नालों पर अतिक्रमण होने के कारण टेंडर नहीं डाला। दोबारा टेंडर निकाला गया और जैसे-तैसे सफाई कराई गई। सवाल यह भी है कि क्या अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी नगर निगम की नहीं है?
और भी हैं मौत के मुहाने
अकेले सूजे खां खिड़की क्षेत्र में पुलिया का मेनहोल खुला नहीं है, बल्कि और भी प्वाइंट ऐेसे हैं, जो जानलेवा हैं।
- बाहर ओरछा गेट स्थित बकरा मंडी में नाले के ऊपर मेनहोल उखड़ा पड़ा है। मुहल्ले के गुलजार मुहम्मद, रमेश खरे, शकूर खान, अशफाक खान ने नगर निगम में शिकायत दर्ज करवाई पर कुछ नहीं हुआ।
- ओरछा गेट से सैंयर गेट जाने वाली मोड़ पर नाले की पुलिया पर मेनहोल को ढंकने के लिए पत्थर से रखा गया था। किसी वाहन की टक्कर से यह पत्थर टूट गया है।
- मेहंदी बाग में जलभराव होने के कारण नाला ओवरफ्लो हो जाता है। सड़कों पर गंदा पानी भर जाता है और तब नाला नजर नहीं आता। मंगलवार को पानी भरने से दो बच्चों को नाला नहीं दिखा और वे उधर निकलने लगे मोहल्ले वालों ने उन्हें बचाया।
जहां कहीं पर भी मेनहोल के जाल टूटे हैं, उन्हें सही कराने की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता की है। 26 जुलाई 2016 को हाल बेहाल शीर्षक से अमर उजाला ने अजय इंक्लेव के पास नाले का चैंबर खुला होने की तस्वीर छापी थी। इसको संज्ञान में लेकर आज ही मुख्य अभियंता को पत्र लिखकर चैंबर पर ढक्कन लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
- रोहन सिंह
अपर नगर आयुक्त