झांसी। प्रवासी मजदूरों को जीविकोपार्जन में मदद के लिए गो आश्रय स्थलों में बंद गाय दी जाएंगी। पशुधन अधिकारियों का दावा है कि गो आश्रयों में कई गो वंश में दूध देने की क्षमता है लेकिन, उचित देखभाल न होने से उनका उपयोग नहीं हो पा रहा। प्रवासी मजदूर इसका लाभ उठा सकेंगे।
लॉकडॉउन के बाद करीब हजारों मजदूरों ने घर वापसी की। इनके पास अब रोजगार के साधन नहीं हैं। इसे देखते हुए तमाम महकमों को गांव में ही स्वरोजगार मुहैया कराने की योजना तैयार करने को कहा गया। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि गो आश्रयों में थारपारकर जैसी प्रजाति की भी गाय है। इनके दूध देने की क्षमता छह लीटर प्रतिदिन है। देखभाल न कर सकने से इनको छोड़ दिया गया। कई देशी गाय भी हैं जिनकी खुराक सही करके उनको दुग्ध उत्पादन लायक बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि ऐसे पशुओं को चिह्नित करके इनको मजदूरों को दिया जाएगा। इनकी खुराक आदि के लिए हर महीने नौ सौ रुपये भी दिए जाएंगे। एक व्यक्ति को अधिकतम पांच गाय तक दिए जाने की योजना है। यहां अभी 780 गाय 410 लोगों के बीच वितरित की जा चुकी। झांसी के गो आश्रय स्थलों में 37 हजार से अधिक निराश्रित गो वंश बंद हैं। बता दें, झांसी में महज प्रति व्यक्ति 200 एमएल दुग्ध उत्पादन ही होता है।