झांसी। परसिस्टेंट डिल्यूजनल डिस्ऑर्डर यानी लगातार भ्रम की स्थिति। यह मनोविकार का ही एक प्रकार है, जिसमें रोगी की किसी व्यक्ति विशेष के प्रति नफरत इतनी ज्यादा तक बढ़ जाती है कि वह उसकी हत्या करने के बारे में भी सोचने लगता है। बीकेडी में हुए गोलीकांड के बाद मनोचिकित्सक को इस बात की आशंका है कि कहीं मंथन सिंह परसिस्टेंट डिल्यूजनल डिस्ऑर्डर का तो शिकार नहीं हो गया?
मनोचिकित्सक डॉ. अर्जित गौरव के अनुसार किसी भी प्रकार के मनोविकार को चार श्रेणियों में बांटकर मापा जाता है। इसमें डिप्रेशन, एंजाइटी, एल्कोहल इंटॉक्सिकेशन और साइकोसिस शामिल हैं। डिप्रेशन का शिकार व्यक्ति खुद को मार लेता है। जबकि, एंजाइटी में कभी ऐसी वारदात नहीं होती है। बल्कि, व्यक्ति स्वयं घबराता रहता है। ड्रग इंटॉक्सिकेशन में जब व्यक्ति जरूरत से ज्यादा नशे का सेवन कर लेता है तो फिर उसके दिमाग में सोचने-समझने की शक्ति खत्म हो जाती है, तब वह इस तरह की घटना को अंजाम दे देता है।
अंतिम श्रेणी साइकोसिस यानी पागलपन की होती है। इसे सिजोफ्रेनिया, टाइप वन पर्सनैलिटी डिस्ऑर्डर और परसिस्टेंट डिल्यूजनल डिस्ऑर्डर में बांटा गया है। मनोचिकित्सक ने बताया कि परसिस्टेंस डिल्यूजन डिस्ऑर्डर में हत्या करने की प्रवृत्ति ज्यादा रहती है। इस अवस्था में शक करना, कानों में अजीबोगरीब आवाज आना आदि समस्याएं शुरू हो जाती हैं। किसी व्यक्ति विशेष के प्रति नफरत बढ़ती जाती है। फिर वह आगे चलकर हत्या करने का विचार करने लगता है। ऐसे में उन्हें आशंका है कि कहीं मंथन इस डिस्ऑर्डर का तो शिकार नहीं हो गया?
पारिवारिक समस्याओं से तनाव में था मंथन!
बुंदेलखंड कॉलेज के शिक्षक और शिक्षिकाओं ने बातचीत में बताया कि मंथन सिंह पारिवारिक तनाव में था। कुछ समय पहले उसकी मां की आंख का इलाज चला। इसके अलावा नवंबर में उसके पिता आईसीयू में भर्ती हो गए। चूंकि, मंथन ने कोरोना के दौरान एनसीसी कैडेट्स के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं, इसलिए कॉलेज के अधिकारियों ने उसे कोरोना वॉरियर प्रमाणपत्र देने के लिए बुलाया था। लेकिन, उसने पिता की तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए आने से इंकार कर दिया था। उसने पिता के आईसीयू में भर्ती होने की फोटो खींचकर भी अधिकारियों को भेजी थी। बतौर एनसीसी कैडेट्स अच्छी सेवाएं देने की वजह से उसे ए सर्टिफिकेट दिया गया था। इसके अलावा सीनियर का पद भी मिला था। मगर, पारिवारिक समस्याओं के चलते कॉलेज कम आने की वजह से यह पद किसी छात्रा को दे दिया गया।