प्रदेश में सरकार गठन के बाद से झांसी विकास प्राधिकरण एक्शन मोड में आ गया है। बुधवार को एसएसपी आवास के सामने बिना मानचित्र स्वीकृत के बन रहे बेसमेंट का काम रोक दिया गया। वहीं, मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में तीन मंजिल इमारत की इजाजत के बाद अवैध तरीके से चौथी मंजिल का निर्माण भी रोक दिया गया। अब दोनों भवन स्वामियों से शमन शुल्क वसूला जाएगा।
बुधवार को उपाध्यक्ष चंद्रविजय सिंह निरीक्षण करने निकले। उन्होंने सबसे पहले सिविल लाइन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आवास के सामने बन रहे बेसमेंट का निरीक्षण किया। जब उन्होंने नक्शा दिखाने को कहा तो भवन स्वामी ने बताया कि नक्शा स्वीकृति के लिए जेडीए में है। उन्होंने बिना नक्शा पास कराए निर्माण कार्य शुरू करने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जमीन स्वामी विजय सरावगी को मानचित्र स्वीकृति के बिना कोई भी निर्माण न कराने को कहा है। अब निर्माण पर शमन शुल्क वसूला जाएगा।
इसके बाद वह मेडिकल कालेज क्षेत्र स्थित जोन-04 में पहुंचे। यहां उन्होंने पाया कि मनोज गुप्ता के मकान में चौथी मंजिल पर निर्माण कार्य चल रहा था, जबकि मकान में तीन मंजिल बनाने का नक्शा पास था। इस पर उनका भी काम रुकवा दिया गया और अवर अभियंता को शमन शुल्क बनाने के निर्देश दिए। इसी तरह अनूप गुप्ता के मकान का नक्शा पास था, लेकिन वह नक्शा में हेरफेर करके मकान का निर्माण करा रहे थे। जेई से उनके मकान पर भी शमन शुल्क लगाने के निर्देश दिए। यहां से वह करगुवांजी पहुंचे। यहां पर संजय राय का मकान बन रहा था, लेकिन नक्शा स्वीकृत नहीं था। उन्होंने काम रुकवा दिया। इस मौके पर अवर अभियंता पीके पटैरिया उनके साथ रहे।
वेबसाइट हो रही तैयार
जेडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि विभाग की वेबसाइट तैयार की जा रही है। नई वेबसाइट अपडेट रहेगी। इस पर जो भी नक्शे स्वीकृत हो रहे हैं, उन्हें अपलोड किया जा रहा है। वेबसाइट जल्द काम करना शुरू कर देगी।
जेई नहीं रखेंगे फाइल
जेडीए उपाध्यक्ष ने निर्देश दिए हैं कि कोई भी अवर अभियंता अपने पास किसी के मकान के नक्शे की फाइल नहीं रखेगा। फाइल संबंधित टेबल पर मिलेगी, ताकि कोई चाहे तो निरीक्षण कर सके। दरअसल, बहुत दिनों से यह समस्या आ रही थी कि यदि किसी मकान के मानचित्र स्वीकृति के लिए कागजों की कमी है तो उसे नोटिस दिया जाता था। नोटिस का जवाब आया अथवा नहीं, संबंधित पटल पर इसकी जानकारी नहीं हो पाती थी। ऐसे में पटल पर उक्त नोटिस पेंडिंग रहती थी। जबकि, संबधित व्यक्ति कागजात पूरे करके अवर अभियंता को दे जाता था। लेकिन, अब ऐसा नहीं हो पाएगा।