ललितपुर। स्थायी लोक अदालत ने दो अलग-अलग मामलों में बीमा कंपनियों को भुगतान करने का आदेश दिया है। इनमें एक कोविड पीड़ित मरीज को बीमा राशि और एक महिला की मृत्यु के बाद उनके परिजनों को बीमा राशि सात फीसदी ब्याज के साथ देने को कहा गया है। स्थायी लोक अदालत की अध्यक्ष सविता बाधवानी ने यह निर्णय सुनाया।
अदालत ने बीमा कंपनियों द्वारा दावों को अस्वीकार करने के बाद यह आदेश दिया। दोनों ही मामलों में पीड़ितों ने अपने पक्ष में साक्ष्य और दलीलें पेश की थीं। अदालत ने सभी सबूतों और दलीलों पर विचार करने के बाद यह फैसला लिया।
कोविड बीमा दावे का मामला
महरौनी के ग्राम सिंदवाहा निवासी बृजेश कुमार ने इफको टोकियो जन इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ वाद दायर किया था। उन्होंने 10 अक्तूबर 2020 को ''''मुस्कुराते रहो कोरोना बीमा रक्षक पॉलिसी'''' ली थी। पॉलिसी लेने के कुछ दिन बाद ही वह कोरोना संक्रमित हो गए और 22 से 29 अक्तूबर 2020 तक तालबेहट में भर्ती रहे। ठीक होने के बाद उन्होंने ढाई लाख रुपये का बीमा दावा किया, लेकिन कंपनी ने यह कहकर मना कर दिया कि वह पॉलिसी लेने के तुरंत बाद बीमार हो गए थे। अदालत ने बीमा कंपनी को बृजेश कुमार को ढाई लाख रुपये की राशि देने का आदेश दिया।
पत्नी की मृत्यु पर बीमा दावा
ग्राम मिर्चवारा के अनौरा निवासी सीताराम ने भारतीय जीवन बीमा निगम के विरुद्ध वाद दायर किया। उनकी पत्नी ने 30 नवंबर 2022 को बीमा कराया था। पॉलिसी की वैधता के दौरान ही 16 दिसंबर 2022 को बीमारी के कारण उनकी मृत्यु हो गई। सीताराम ने जब बीमा दावा किया तो भारतीय जीवन बीमा निगम ने मृत्यु को संदेहजनक मानते हुए भुगतान से इन्कार कर दिया। स्थायी लोक अदालत ने बीमा कंपनी को सीताराम को पांच लाख रुपये की बीमा पॉलिसी राशि सात फीसदी ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है।