झांसी। बुंदेलखंड के छोटे-बड़े किले से लेकर मंदिरों के आसपास के क्षेत्र को पर्यटन का हब बनाने के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (बीयू) प्रदेश सरकार के साथ मिलकर काम करेगा। इसके लिए शासन से सहमति मिल चुकी है। बुंदेलखंड में कई ऐतिहासिक स्थल हैं, जहां का सौंदर्यीकरण और सुविधाएं बढ़ाई जाएं तो यहां पर्यटन को काफी बढ़ावा मिल सकता है।
किले, गढ़ी को संरक्षित करने के लिए प्रदेश सरकार ने बीयू के होटल प्रबंधन एवं पर्यटन संस्थान के साथ काम करने पर सहमति जता दी है। आईटीएचएम विभागाध्यक्ष प्रो. सुनील काबिया ने बताया कि बुंदेलखंड में साहसिक, सांस्कृतिक/साहित्यिक, धार्मिक, हेरिटज और कृषि एवं इको पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। ललितपुर के देवगढ़, दतिया के सोनागिर समेत बुंदेलखंड में कई ऐतिहासिक मंदिर हैं, जिसके आसपास के क्षेत्र को भी पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जा सकता है।
साथ ही झांसी, चित्रकूट, ललितपुर आदि जिलों में एडवेंचर टूरिज्म को काफी बढ़ावा दिया जा सकता है। बुंदेलखंड के जंगल ट्रैकिंग एंड हाइकिंग यानी कच्चे रास्तों पर चलते हुए प्राकृतिक आनंद लेने, कैंप लगाकर रुकने आदि के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं। झांसी, ललितपुर, चित्रकूट आदि पहाड़ी इलाकों में दीवार पर चढ़ना, ऊंचाई से नीचे उतरना के अलावा हवाई पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि बेतवा, केन, चंबल, जामुनी आदि नदियों में वाटर स्पोर्ट्स जैसे कि रिवर क्रॉसिंग, कनोइंग, राफ्टिंग आदि शुरू हो सकते हैं। जैसे ही शासन द्वारा बुंदेलखंड के पहाड़, गढ़ी के विकास का खाका तैयार करने का काम शुरू होगा, इसको प्रस्ताव में शामिल कराने का प्रयास किया जाएगा।
पीएम भी विकास पर दे चुके हैं जोर
झांसी। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश सरकार को बुंदेलखंड के किलों को देखने के लिए अच्छा टूरिज्म सर्किल बनाने के निर्देश दिए थे। पीएम ने कहा था कि सर्दियों में किले पर चढ़ने की प्रतियोगिता कराई जाए। ये प्रतियोगिता आसान रास्ते से नहीं, बल्कि कठिन रास्ते से चढ़ने की हो।