झांसी। नगर निगम की कार्यकारिणी समिति की बैठक में बुधवार को पार्षदों ने भ्रष्टाचार की जमकर पोल खोली। इस दौरान नगर निगम की संपत्ति पर हुए कब्जों, टेंडरिंग प्रक्रिया में किए गए खेल समेत तमाम मुद्दों को उठाया। इस दौरान कई मुद्दों पर घंटों तक जमकर बहस चली। इसके चलते देर रात तक बजट का अनुमोदन नहीं हो सका। अब गुरुवार को बजट पर चर्चा होगी।
नगर निगम की कार्यकारिणी समिति की बैठक महापौर रामतीर्थ सिंघल की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे शुरू हुई। इस दौरान पार्षद दिनेश सिंह दीपू ने संपत्ति विभाग में आउटसोर्स पर लगे कर्मचारियों द्वारा किए गए कार्यों का विवरण मांगा। नगर निगम ने आउट सोर्स पर कर्मचारियों को नियुक्ति देने में प्रक्रिया का पालन नहीं किया। जबकि दो कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस दिए हटा दिया गया। उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया और कर्मचारियों को हटाने का कारण पूछा। इस पर अधिकारी एक-दूसरे का मुंह ताकते रहे। इसे लेकर काफी देर तक हंगामा होता रहा। पार्षद ने कहा कि नगर निगम की बिजौली गोशाला की जमीन की पैमाइश नहीं हुई।
लहरगिर्द में पीएनजी को दी गई छह हजार वर्ग मीटर जगह के बाद शेष बची करीब 1500 वर्ग मीटर जगह पर अवैध कब्जे हैं। निगम की जमीन पर अवैध कब्जे करने वालों के खिलाफ कोई एफआईआर नहीं कराई गई। उनाव गेट अंदर चुंगी पर दुकानों का निर्माण हो गया। पार्षदों ने आरोप लगाया कि संपत्ति विभाग के अधिकारी निगम की संपत्ति में घालमेल कर रहे हैं। इसलिए बोर्ड ने आउटसोर्स पर लगाए गए कर्मचारियों को हटाकर नए सिरे से भर्ती कराने का प्रस्ताव पास किया। बैठक में उपसभापति राजेश त्रिपाठी, पार्षद विमल किशोर, अरविंद कुमार, इंदु वर्मा, किशोरी रायकवार, बंटी सोनी, प्रदीप नगरिया, अपर नगर आयुक्त अरुण गुप्त, शादाब असलम, रोहन सिंह, मुख्य अभियंता एलएन सिंह, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके निरंजन, अमित शर्मा समेत तमाम अधिकारी मौजूद रहे।
बोर्ड बैठक हाईलाइट्स
- पार्षद विकास खत्री ने की भूसा, चोकर के टेंडर की जांच की मांग
- पार्षद सुनील नैनवानी ने नई तहसील के पास बनी दुकानों की नीलामी और जमानत राशि वापस नहीं करने का मुद्दा उठाया।
- पार्षद अपना भोजन, पानी और चाय लेकर पहुंचे। कहा कि पिछले साल हुई पार्षदों की बैठक में भोजन का खर्च निगम ने दो लाख 31 हजार रुपये दिखाया है।
- नगर आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने संपत्ति विभाग में लगाए गए आउटसोर्स कर्मियों की सेवा समाप्त की जाएगी। साथ ही संपत्ति के मामलों को खुद देखने की बात कही।
- महापौर रामतीर्थ सिंघल ने अधिकारियों से आउटसोर्स की नियुक्ति प्रक्रिया का सात दिन में जवाब मांगा है।