झांसी। पारीछा थर्मल प्लांट में कोयले की रैक कम आने व गीले कोयले के वैगनों को खाली करने में आ रही दिक्कतों के कारण उत्पादन इकाइयों के बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। अभी स्टाक में रखे कोयले से काम चलाया जा रहा था, मगर वह भी अब खत्म हो गया है। कोयला कम लगे इसके लिए तेल की भी मात्रा बढ़ा दी गई है।
पारीछा थर्मल पावर प्लांट में 110-110 मेगावाट की दो, 210- 210 मेगावाट की दो व 250- 250 मेगावाट की दो इकाइयां लगी हुई हैं। वर्तमान में पांच इकाइयां सुचारु रूप से काम कर रही हैं। इन इकाइयों को बिजली बनाने के लिए 24 घंटे में 16 हजार टन कोयले (कम से कम चार मालगाड़ी) की आवश्यकता पड़ती है। यह कोयला बिहार व महाराष्ट्र के नागपुर की तरफ से आता है। चूंकि, उक्त दोनों ही स्थानों पर बारिश हो रही है, इस कारण कम गुणवत्ता का गीला कोयला प्लांट में आ रहा है। इससे एक तो गीले कोयले से भरी वैगनों को खाली करने में परेशानी आ रही है, दूसरा पूरी क्षमता से उत्पादन भी नहीं हो पा रहा है।
बारिश के कारण मालगाड़ी की रैक भी एक दिन में दो से अधिक नहीं आ रही हैं, इससे स्टाक में रखा कोयला भी खत्म हो गया है। सोमवार से तेल की मात्रा बढ़ाकर उत्पादन किया जा रहा है। इन स्थितियों में चालू इकाई में कौन सी इकाई को कब बंद करने की स्थिति आ जाए, कहां नहीं जा सकता है। प्लांट के अफसर भी इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। मालूम हो कि नंबर दो इकाई पिछले सवा साल से आग लगने के कारण बंद चल रही है। इस इकाई को शुरू करने के लिए मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर जारी है।