झांसी। फसल कटाई का मौसम शुरू होते ही झांसी में पराली जलाए जाने की घटनाएं प्रकाश में आनी शुरू हो गईं लेकिन, प्रशासन एवं कृषि विभाग के अफसरों को इसकी भनक तक नहीं है। रक्सा के अंर्तगत आने वाले पलींदा एवं आसपास के कुछ गांवों में किसानों ने धान कटाई के बाद खेत में ही पराली एकत्रित करके उसमें आग लगा दी। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक पराली में आग सोमवार सुबह लगाई गई। पराली में आग लगने के बाद भी मौके पर न कृषि अफसर पहुंचे और न ही प्रशासन की ओर से कोई पहुंचा।
बता दें, पिछले वर्ष पराली जलाए जाने वाले प्रमुख शहरों में झांसी का नाम शुमार था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव को फटकार लगाते हुए पराली जलाए जाने पर तत्काल रोक लगाए जाने के निर्देश दिए। उसके बाद बड़ी संख्या में किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने के साथ ही उनसे जुर्माना भी वसूला गया लेकिन, अब मौसम फिर आरंभ होने के बावजूद न प्रशासन को इसकी परवाह है न ही कृषि महकमे की ओर से अब तक कोई अभियान चलाया गया। पराली को नष्ट करने के उपायों के बारे में बताने के लिए भी कोई प्रयास अब तक शुरू नहीं हुए।
कृषि विभाग में सिर्फ एक अफसर के भरोसे पूरा जिला
बुंदेलखंड में झांसी को सबसे अहम जनपद माना जाता है। सरकार यहां किसानों को आगे बढ़ाने के लिए नई-नई योजनाओं के दावे करती है लेकिन हकीकत में यह सारी योजनाएं सिर्फ एक अफसर के कंधे पर ही सवार हैं। झांसी में उपनिदेशक कृषि प्रसार जैसा अतिमहत्वपूर्ण पद पिछले दो महीने से खाली है। इसका प्रभार जिला कृषि अधिकारी कमलेश कुमार सिंह के पास है। इसी तरह भूमि संरक्षण अधिकारी की जिम्मेदारी भी जिला कृषि अधिकारी ने संभाल रखी है। एक ही अधिकारी के पास तीन विभागों की जिम्मेदारी होने से किसी भी काम की कोई निगरानी नहीं हो पा रही। इसी तरह अपनी समस्याओं को लेकर आने वाले किसानों को भी मायूस होकर लौट जाना पड़ता है।