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पापा मुझे छोड़ दो, मत मारो..चिल्लाता हुए बंद घर में दौड़ता रहा अंशुल

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अंशुल। (फाइल फोटो)
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झांसी। पापा मुझे मत मारो, छोड़ दो। बचने को घर में काफी दौड़ा था अंशुल। मुहल्ले वालों ने भी बच्चे की चीखें सुनीं थीं लेकिन यह सोचकर खामोश हो गए कि मां-बाप किसी गलती पर उसे पीट रहे होंगे। कुछ ही देर में सब कुछ खामोश भी हो गया था। पुलिस का कहना है कि माना जा रहा है कि पहले जितेंद्र ने अपने बेटे को मारा और बाद में पत्नी की हत्या की है। पलंग पर पड़ा बिस्तर भी अस्त-व्यस्त था जिससे माना जा रहा है कि अनीता ने भी संघर्ष किया है।
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थाना प्रेमनगर के मुहल्ला खैरा निवासी जितेंद्र श्रीवास मूल रूप से बड़ागांव का रहनेे वाला था। उसके पिता रमेश व मां रामसखी बड़ागांव में ही रह रहे हैं। करीब दो साल पहले मकान बनवाने के बाद जितेंद्र अपनी पत्नी अनीता व पुत्र अंशुल के साथ खैरा मुहल्ले में रह रहा था। बताया गया कि लंबे समय से वह बीमार था। पेट में अल्सर था। डिप्रेशन में चला गया था। एसपी सिटी राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि उसके पेट का इलाज दिल्ली के एम्स और मानसिक बीमारी का इलाज लखनऊ पीजीआई में चल रहा था। 20 फरवरी को वह अपने रिश्तेदार के साथ दिल्ली एम्स से इलाज कराने गया था। एक मार्च को दोबारा उसे जांच के लिए एम्स बुलाया गया था। दिल्ली जाने से पहले उसने शुक्रवार की दोपहर अपने भाई व रिश्तेदार से बात की थी। शनिवार रात को रिश्तेदार के साथ दिल्ली जाना था। बेटा अंशुल ट्यूशन पढ़कर सुबह करीब 9.30 बजे घर लौटा। पत्नी अभी खाना बनाने की तैयार कर रही थी। इसी बीच अचानक जितेंद्र ने घर का मुख्य द्वार बंद किया और फिर भीतर से कमरा भी बंद कर लिया। पुलिस का कहना है कि उसने अचानक अपने बेटे अंशुल को पकड़ा होगा और मारने लगा। वह इधर-उधर दौड़ा भी था। महिलाओं ने भी चीख सुनने की बात कही है।
शुक्रवार से नहीं गया था ऑफिस
बताया गया है कि शुक्रवार से मृतक जितेंद्र ऑफिस नहीं गया था। शनिवार से दिल्ली जाने के लिए छुट्टी भी ले रखी थी। अचानक हुई घटना के बाद ऑफिस वाले भी हैरान हैं। मृतक जितेंद्र की वर्ष 2006 में अनीता सेे शादी हुई थी। उनकी ससुराल मध्य प्रदेश में दतिया के सेवड़ा में है।
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