झांसी। राह चलते किसी को आपात परिस्थिति में मदद उपलब्ध कराने के लिए शहर में पौने दो करोड़ रुपये की लागत से 12 प्रमुख जगहों पर पैनिक बटन लगाए गए हैं। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत यह सुविधा दी गई है लेकिन देखरेख न होने से किसी का बटन खराब हो गया तो कोई बैनर-पोस्टर के पीछे छिप गया। कई जगह बटन सड़क से दिखता ही नहीं। ऐसे में मुसीबत में फंसे आदमी के लिए इसे तलाशना भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
इमरजेंसी कॉल पहुंचती है नगर निगम कंट्रोल रूम में
राहगीरों के साथ कोई घटना-दुर्घटना, समस्या होने पर आसानी से मदद उपलब्ध कराने के लिए यह पैनिक बटन लगाए गए हैं। इनमें किसी भी बटन को दबाते ही इमरजेंसी कॉल नगर निगम में बने कंट्रोल रूम में पहुंच जाती है। वहां से मदद उपलब्ध कराने के लिए ऑपरेटर की आवाज आने लगती है। ये सेवा 24 घंटे काम करती है। इसके लिए कंट्रोल रूम में अलग से ऑपरेटर तैनात हैं लेकिन इन पैनिक बटन की देखरेख का कोई इंतजाम नहीं है।
मंगलवार को अमर उजाला टीम ने जब कुछ प्रमुख जगहों पर पैनिक बटन की पड़ताल की तब हकीकत सामने आई। कई जगह यह पैनिक बटन खराब मिले। शहर के सबसे प्रमुख स्थान इलाइट चौराहे पर लगा पैनिक बटन से सिर्फ कंट्रोल रूम की आवाज सुनाई दी। जीवनशाह पर लगा बटन काम तो कर रहा था लेकिन मुसीबत में फंसा आदमी इसे खोज सके, यह उसके लिए आसान नहीं।
अधिकतर खराब
खंडेराव गेट पर लगा बटन पूरी तरह खराब मिला। सबसे व्यस्त कचहरी चौराहे पर लगा बटन भी खराब था। इसे दबाने पर सिर्फ बीप की आवाज सुनाई पड़ी। बीकेडी चौराहे का पैनिक बटन काम करता मिला लेकिन काफी अंदर होने से उसके आगे बैनर एवं होर्डिंग तान दिए गए। इस वजह से यह बटन आसानी से नहीं दिखता। सड़क से इसे नहीं देखा जा सकता। हालांकि बस अड्डा, मेडिकल कॉलेज, मिर्नवा चौराहा पर लगा पैनिक बटन काम करता मिला। वहीं, नगर आयुक्त सत्य प्रकाश ने जिन जगहों पर पैनिक बटन के काम न करने पर उनको जल्द दुरुस्त कराने की बात कही है।
इन जगहों पर लगे हैं पैनिक बटन
इलाइट चौराहा, बीकेडी चौराहा, बस स्टैंड, मेडिकल गेट नंबर एक, मिनर्वा चौराहा, जीवनशाह तिराहा, गोविंद तिराहा, रस बहार चौराहा, आवास विकास तिराहा, नगरा हाट, खंडेराव गेट, सदर बाजार हैं।