शहर के प्राचीन तालाब पानी वाली धर्मशाला के पर्यटन विकास की योजना दो साल पहले शुरू की गई थी, लेकिन इसके पूरा होने से पहले ही काम बंद कर दिया गया था। बाद में बताया गया कि स्मार्ट सिटी के तहत इसका विकास होगा, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई काम आगे नहीं बढ़ा है। जबकि, धरातल पर स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। तालाब जलकुंभी से पटा पड़ा है। गंदा पानी जमा होने की वजह से इसमें बदबू आ रही है। आसपास के लोग परेशान हैं। बावजूद, ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
पानी वाली धर्मशाला शहर की घनी आबादी के बीचों बीच स्थित एक प्राचीन तालाब है। इसके पास में ही प्राचीन गणेश मंदिर है, जिसमें महारानी लक्ष्मीबाई का राजा गंगाधर राव से विवाह हुआ था। इसके अलावा तालाब के तीन किनारों पर हजारिया महादेव, अन्नपूर्णा देवी मंदिर व अन्य मंदिर भी स्थित है। इसका ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्व तो है ही, साथ ही आसपास के इलाके के भूगर्भ जल के स्तर को भी बढ़ाने में इस तालाब की भूमिका है। 2017 में इसके पर्यटन विकास की योजना शुरू की गई थी। लेकिन, योजना सुनियोजित न होने की वजह से काम पूरा होने से पहले ही बंद हो गया था। दरअसल, धर्मशाला के सुशोभीकरण का काम 2017 में बरसात से ठीक पहले शुरू किया गया था। सबसे पहले इसका गंदा पानी बाहर निकाला गया था और इसके बाद नीचे तलहटी में जमा सिल्ट साफ करने का काम किया गया था। लेकिन, काम पूरा हो पाता है, इससे पहले ही बारिश शुरू हो गई, जिससे तालाब फिर से पानी से लबालब भर गया। पास के नाले का गंदा पानी भी इसमें जमा हो गया था। लगभग बीस लाख रुपये खर्च होने के बाद काम बंद कर दिया गया था।
इसके बाद नगर निगम की ओर से बताया गया था कि पानी वाली धर्मशाला का स्मार्ट सिटी योजना के तहत विकास किया जाएगा, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई भी काम धरातल पर नहीं हुआ है।
ये होने थे काम
--------------
- गंदे पानी को रोकने के लिए नाले -नालियों का डायवर्जन किया जाना था।
- चारों ओर सीढ़ियों पर लाल पत्थर और बैंच लगनी थीं।
- तालाब के बीच में फव्वारा लगना था।
- साफ पानी की व्यवस्था के लिए दो जगह बोरिंग होनी थी।
- चारों ओर आकर्षक लाइटिंग की जानी थी।
- आसपास के सभी मकानों की बाहरी दीवारों का रंग एक किया जाना था।
- धर्मशाला तक पहुंचने वाले रास्तों का भी विकास होना था।
पानी वाली धर्मशाला के ऐतिहासिक महत्व को दृष्टिगत रखते हुए इसे स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत शामिल किया गया है। इसका पर्यटन की दृष्टि से विकास होगा। इसकी योजना बनाई जा रही है। कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद धरातल पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
- प्रताप सिंह भदौरिया, नगर आयुक्त