झांसी। मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शुमार पंचायत भवनों का निर्माण दूसरे कार्य में पैसा खर्च कर देने से बीच राह में फंस गया जबकि शासन ने साफ तौर पर इसके लिए पंचायत निधि के इस्तेमाल करने को कहा था। अफसरों ने सरकारी फरमान की अनदेखी करते हुए इसके बजाय दूसरे निर्माण कार्यों में पैसा खर्च कर दिया।
ग्राम पंचायतों के पास अपने पंचायत भवन की व्यवस्था के लिए सरकार ने पिछले वर्ष यह काम शुरू कराया था। इसके जरिए सचिवालय की तर्ज पर सभी सहूलियत एक ही छत के नीचे मुहैया कराई जानी है। सरकार की योजना है कि चुनावी वर्ष में इसे उपलब्धि के तौर पर गांवों में प्रचारित किया जाए। इसके लिए शासन स्तर पर लगातार इसकी मॉनीटरिंग भी हो रही लेकिन, इसके बावजूद अपने फायदे के लिए अफसरों ने सड़क, नाली, खड़ंजा जैसे कार्यों में ही पूरी पंचायत निधि खर्च कर दी।
जानकारी के मुताबिक बामौर, मोंठ, बंगरा एवं मऊरानीपुर ब्लॉक की बड़ी ग्राम पंचायतों ने भी पंचायत भवन के बजाए नाली, सड़क, खंडजा के भुगतान पर ही पंचायत निधि खर्च कर दी और इसका निर्माण मनरेगा के भरोसे छोड़ दिया। मनरेगा के जरिए समाग्री का भुगतान न होने से काम बीच में फंस गया। बता दें, जनपद में कुल 126 नए पंचायत भवन बन रहे। इनमें करीब 45 पंचायत भवनों का निर्माण इस वजह से अटका हुआ है। अब इस काम को आगे बढा़ने को लेकर माथापच्ची चल रही है। शुरुआत में यह काम नवंबर में पूरा होना था लेकिन, काम पिछड़ने से समय बढ़ा दिया गया है।