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घोर लापरवाही: पंचायत चुनाव ने छीन ली जिंदगी, अफसरों ने फिर लगा दी मृत शिक्षक की ड्यूटी

Sat, 12 Jun 2021 08:08 PM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
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यूपी पंचायत उप चुनाव में ड्यूटी पर तैनात शिक्षक - फोटो : अमर उजाला।
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त्रिस्तरीय पंचायत उप-चुनाव के लिए उस शिक्षक की भी ड्यूटी लगा दी गई जिसकी कुछ दिनों पहले चुनावी ड्यूटी करने से कोविड के चलते मौत हो गई थी। असंवेदनशील प्रशासन ने मृत शिक्षक के नाम चुनावी ड्यूटी स्लिप भी जारी कर दी। जिसमें मृत शिक्षक को बृहस्पतिवार से आयोजित प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेने के निर्देश दिए गए। इसी तरह चुनावी ड्यूटी के दौरान कोरोना पॉजिटिव दूसरे कर्मचारियों की भी ड्यूटियां लगाई गई हैं।

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रिक्त ग्राम प्रधान समेत ग्राम पंचायत सदस्य पदों के लिए इन दिनों उप-चुनाव कराए जा रहे हैं। इसको देखते हुए चुनावी ड्यूटियां लगाए जाने का काम शुरू हुआ। मगर बीते बुधवार को हैरतअंगेज तरीके से पिछले माह कोविड से मृत बेसिक शिक्षा विभाग के सहायक अध्यापक सौरभ कुमार तलैया के नाम से उप-चुनाव में चुनावी ड्यूटी संबंधी परवाना घर पहुंच गया। इस परवाने ने उनके परिजनों के जख्म फिर ताजे कर दिए।

जिलाधिकारी की ओर से जारी इस ड्यूटी पत्र में दिवगंत सौरभ को विकास खंड मोंठ की पोलिंग पार्टी संख्या- 81 में मतदान अधिकारी प्रथम के तौर पर ड्यूटी लगाई गई। उनको 10 जून को प्रशिक्षण के लिए दोपहर 12 से एक बजे के बीच दीनदयाल सभागार में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। ऐसा न करने पर निर्वाचन ड्यूटी से अनुपस्थित मानते हुए कार्रवाई तक का अल्टीमेटम दे दिया गया। वहीं, इसकी जानकारी मिलने पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के कार्यकारी अध्यक्ष कुलदीप द्विवेदी ने रोष जताया है। उनका कहना है बहुत संभव है दूसरे मृत कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगाई गई हो, लेकिन वह अभी तक सामने नहीं आए हैं। उनका कहना है कि कोविड पॉजिटिव कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगा दी गई है।
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सरकारी मुआवजा सूची में भी सौरभ का नाम, फिर भी लगाई दी ड्यूटी
पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान जिन कर्मचारियों की मौत हुई उनकी सूची प्रशासन ने तैयार कराई थी। पहली सूची में कुल 36 कर्मचारी शामिल किए गए। इसमें सौरभ तलैया का नाम 12वें नंबर पर शामिल किया गया है। उस सूची में सौरभ की मृत्यु 30 अप्रैल की दर्ज है। उनकी मतदान कर्मिक के तौर पर उनकी ड्यूटी बंगरा ब्लॉक में लगाई गई थी। उसी दौरान वह कोविड की चपेट में आ गए। उपचार के बाद भी उनको बचाया नहीं जा सका। वहीं, मतदान के लिए ड्यूटी लगाते समय प्रशासन ने इस मुआवजा सूची में भी गौर करना जरूरी नहीं समझा और बेहद असंवेदनशील तरीके से ड्यूटियां लगा दी गईं।

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