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पाकिस्तान की जेलों में हिंदुस्तानी बंदियों को दी जाती है यातना

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झांसी। पाकिस्तान की अलग-अलग जेलों में 13 साल तक सजा काटने वाले सोनू सिंह ने खूब यातनाएं सहीं। जासूस होने के शक में उन्हें डंडों से पीटा जाता था। करंट भी लगाए जाते थे। पांच साल से अधिक समय तक यह सिलसिला चला। जब पाकिस्तान की पुलिस को स्पष्ट हो गया कि वह जासूस नहीं है तो उसकी पिटाई बंद कर दी गई। सजा पूरी होने के बाद अमृतसर से झेलम एक्सप्रेस से अपने घर ललितपुर जाते समय शनिवार को सोनू सिंह ने झांसी रेलवे स्टेशन पर अमर उजाला से अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने अमर उजाला की पहल पर अमृतसर से शीघ्र वापसी पर आभार भी जताया।
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शनिवार की रात ललितपुर के सतवांसा गांव के सोनू सिंह, अपने पिता रोशन सिंह, जिला प्रशासन की ओर से भेजे गए राजस्व निरीक्षक रहीश खान व पुलिस उपनिरीक्षक विष्णु कुमार के साथ झेलम एक्सप्रेस से अमृतसर से ललितपुर पहुंच गए। ट्रेन के झांसी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म दो पर आने पर उन्होंने बताया कि वह होटल में काम करने की इच्छा लेकर 13 साल पहले परिजनों को बिना बताए अमृतसर चले गए थे। उस वक्त उनकी मनोदशा ठीक नहीं थी। अमृतसर से वह कब पाकिस्तान की सीमा में पहुंच गए, पता ही नहीं चला। शुरूआत में उनका डेढ़ साल तक लाहौर में उपचार चला। चिकित्सक उनका पूरा ध्यान रखते थे। इसके बाद उनको अलग- अलग जेलों में रखा गया। जेल में पांच साल बड़ी मुश्किल से गुजरे। जासूस होने के शक में डंडे से पिटाई होती थी। कई बार करंट के शॉक दिए गए। जब स्पष्ट हो गया कि वह जासूस नहीं है तो उसे परेशान नहीं किया गया। सुबह शाम खाने में एक- एक पराठा, हलुआ व चाय मिलती थी। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह कभी अपने घर वापस लौट पाएंगे। परिजनों की बहुत याद आती थी। घर पहुंचकर अब एक नया जीवन शुरू करूंगा। सोनू ने बताया कि पाकिस्तान की जेलों में हिंदुस्तान के 75 और लोग भी बंद हैं। उन्हें भी खूब यातनाएं दी जाती हैं।
पिता की आंखों में थी चमक
बेटे को लाते वक्त सोनू के पिता की आंखों में खुशी की चमक थी। दोनों सरकारी कर्मचारी भी खासे उत्साहित थे। पाकिस्तान से आने के बाद सोनू 38 दिन से अमृतसर में रह रहा था। ललितपुर जिला प्रशासन की सक्रियता की कमी की वजह से वह अपने घर नहीं आ पा रहा था। अमर उजाला ने लगातार यह मामला प्रमुखता से उठाया। यही नहीं इसे गृह सचिव तक पहुंचाया। इसके बाद दोनों गृह विभाग ने सोनू को लाने की अनुमति और निर्देश जिला प्रशासन को दिए थे।
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