झांसी। जिला अस्पताल में सोमवार को अनदेखी की हद हो गई। दर्द से छटपटा रहे एक मरीज को अस्पताल कर्मचारी ताले में बंद कर चले गए। वह करीब चार घंटे बेहोश पड़ा रहा। होश में आने के बाद वह बाहर निकलने के लिए गुहार लगाता रहा। मीडियाकर्मियों की सूचना पर अस्पताल प्रशासन की नींद टूटी और उसे बाहर निकाला। निराश मरीज ने कहा कि दोबारा कभी जिला अस्पताल नहीं आऊंगा।
सोमवार की सुबह करीब 11 बजे बड़ागांव गेट बाहर निवासी आकाश राय पेट दर्द से कराहते हुए अस्पताल पहुंचे। पर्चा बनवाकर उन्होंने डॉक्टर का परामर्श लिया। आकाश ने बताया कि इसके बाद उनका दर्द बढ़ गया और चक्कर आने लगा। इस कारण वे पर्चा बनाने वाले कमरे में बेंच पर लेट गए। दर्द के कारण बेहोश हो गए। इस बीच अस्पताल कर्मी चैनल गेट में ताला डालकर उन्हें अंदर ही बंद कर गए। करीब तीन बजे जब उन्हें होश आया तो खुद को बंद पाया। वह बाहर निकलने के लिए मदद की गुहार लगाते रहे। लेकिन किसी ने भी उनकी नहीं सुनी। जबकि पास में ही इमरजेंसी कक्ष है, जहां हर समय किसी न किसी की ड्यूटी रहती है। मीडिया कर्मियों के अस्पताल पहुंचने पर आकाश ने अपना दर्द बयां किया और हाथ जोड़कर बाहर निकलवाने की विनती की। इसके बाद अस्पताल प्रशासन की नींद टूटी और चार घंटे बाद वह बाहर निकल सके।
‘मामले की जानकारी होने पर मैं शाम को अस्पताल गया था, तब तक सब स्थिति सामान्य हो चुकी थी। मंगलवार को पूरी जानकारी हासिल करूंगा। जो दोषी होगा उस पर कार्रवाई होगी’
डॉ. केके गुप्ता, सीएमएस
आवारा जानवरों ने मचाया आतंक
शाम करीब 4:30 बजे 10-12 आवारा जानवर जिला अस्पताल के अंदर घुस आए। इससे वहां अफरा- तफरी मच गई। मरीजों और तीमारदारों में भगदड़ मच गई। उस दौरान सड़क हादसे में घायल 11 बच्चों का इमरजेंसी में उपचार चल रहा था। सदर विधायक रवि शर्मा भी वहां मौजूद थे। जानवर आधा घंटे तक धमा-चौकड़ी मचाते रहे। शुक्र रहा कि वे इमरजेंसी या वार्ड में नहीं घुसे। अन्यथा मरीजों को नुकसान हो सकता था। आधा घंटे बाद जानवर खुद ही बाहर चले गए।