झांसी। अगर आप यह सोचकर जिला अस्पताल आ रहे हैं कि यहां सारी दवाएं मिल जाएंगी और बाहर से कुछ नहीं खरीदना पड़ेगा तो यह ख्याल अपने मन से निकाल दीजिए। जिला अस्पताल में मरीजों को कई दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। ये हाल तब है, जब कोरोना काल में लंबे समय तक अस्पताल बंद रहा। ऐसे में अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता होनी चाहिए थी। मगर मरीजों को मेडिकल स्टोरों से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। अमर उजाला की पड़ताल में यह बात उजागर हुई।
जिला अस्पताल में शनिवार को कुछ ऐसे मरीज भी अस्पताल में मिले, जिनकी नौकरी लॉकडाउन में चली गई। ऐसे में उनके लिए बाहर की दवाएं खरीदना मुमकिन नहीं है। मरीज ये कहते नजर आए कि ऐसे सरकारी अस्पताल का क्या फायदा, जहां बाहर से ज्यादातर दवाएं खरीदनी पड़ें। वहीं, एक मरीज तो दतिया से यहां दिखाने के लिए आया था, उसे भी बाहर की दवाएं लिखी गईं।
300 रुपये दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूर ने बताया कि उसका पूरा पैसा अस्पताल आने और बाहर की दवा खरीदने पर ही खर्च हो गया। अब कहां से वह खानपान व अन्य जरूरी सामान खरीदेगा। वहीं, इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ.केके गुप्ता से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि पारिवारिक कारणों से वह छुट्टी पर हैं। सोमवार को अस्पताल पहुंचेंगे। तब मामले की जांच करेंगे।
मरीजों ने बयां किया दर्द
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आंख दिखाने के लिए आया हूं। यहां पर पूरी दवाएं नहीं मिल रही हैं। इलाज कराना है तो मजबूरी में बाहर से दवा खरीदनी ही पड़ेगी। ऐसे सरकारी अस्पताल का क्या फायदा, जहां अधिकतर दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ें। - प्रकाश, प्रेमनगर।
हांफनी की शिकायत पर अस्पताल दिखाने आया हूं। सीरप और कई दवाएं नहीं मिली हैं। मजदूरी करके गुजर बसर करता हूं। दिहाड़ी 300 रुपये मिलती है। पूरा पैसा किराया और दवाएं खरीदने पर ही खर्च हो गया। - अरविंद कुमार, मोंठ।
पेट में दर्द होने पर अस्पताल दिखाने आया हूं। छह में से तीन दवाएं तो मिली ही नहीं। गांव में छोटा-मोटा काम करता हूं। बाहर से दवा खरीदना बस के बाहर है। अब समझ नहीं आ रहा कैसे इलाज कराऊं। - रामजी, रक्सा।
काफी समय से पैर में दर्द की समस्या बनी हुई थी। इसलिए जिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने के लिए आया हूं। यहां कुछ दवाएं तो मिल गईं, बाकी कुछ दवाएं यहां नहीं होने पर बाहर से खरीदनी पड़ी हैं। - अनुभव, दतिया।
दो महीने से इलाज कराने के लिए आ रहा हूं। कभी भी पूरी दवाएं यहां नहीं मिलीं। आज सात में से सिर्फ दो ही दवाएं अस्पताल से मिली हैं। बाकी बाहर से खरीदी हैं। लॉकडाउन में कामकाज भी छूट गया है। - मुन्नीलाल, बंगलाघाट।
कई दिनों से खांसी बनी हुई है। शुक्रवार को अस्पताल में दिखाने के लिए आया था। कुछ दवाएं अस्पताल में नहीं मिल रही हैं। दवा काउंटर पर कहा गया कि जितनी दवाएं हैं, उतनी दे दी गई हैं। बाकी बाहर से लो। - जितेंद्र, नंदनपुरा।