झांसी। राजकीय संग्रहालय में आयोजित 10 दिवसीय कार्यशाला के तीसरे दिन चितेरी कला और टेराकोटा पेंटिंग की बारीकियों से अवगत कराने के साथ ही स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया गया। कार्यशाला का संचालन कर रहीं वरिष्ठ प्रशिक्षिका नीलम सारंगी ने प्रतिभागियों को बताया कि चितेरी पेंटिंग में प्राकृतिक रंगों का विशेष महत्व होता है।
इनमें मुख्य रूप से लाल, पीला, हरा, नीला, सफेद और काला रंगों का प्रयोग किया जाता है। यह स्थानीय मिट्टी, पत्थरों और वनस्पतियों से तैयार किए जाते हैं। इन रंगों की सहायता से कलाकार मिट्टी की वस्तुओं, दीवारों और घरेलू सजावटी सामग्रियों को सुंदर और जीवंत रूप देते हैं। चितेरी कला का प्रयोग पारंपरिक रूप से घरों की दीवारों की सजावट, त्योहारों के अवसर पर मिट्टी के बर्तनों, धार्मिक चित्रों, और अब आधुनिक समय में हस्तशिल्प उत्पादों के डिजाइन में भी किया जा रहा है। यह कला न केवल सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखती है, बल्कि इससे जुड़े कलाकारों के लिए आजीविका का साधन भी बनती जा रही है। प्रशिक्षिका ने कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को स्वयं का स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रेरित करते हुए जानकारी दी।