झांसी। चीन में कोरोना के प्रकोप के चलते भारत में दवा उत्पादकों को खासकर एंटीबायोटिक और पेन किलर का कच्चा माल मिलने में बहुत परेशानी हो रही है। झांसी के दवा कारोबारियों को मांग की 50 फीसदी आपूर्ति ही हो पा रही है। जो दवाएं पहले दो सप्ताह में मिल जातीं थीं, वो अब डेढ़-दो महीने में भी नहीं मिल पा रही हैं। इन हालातों में डेढ़-दो महीने में ये दवाएं 20 से 30 फीसदी तक महंगी हो सकती हैं।
भारत में चीन से ही दवाओं का ज्यादातर कच्चा माल आता है। हालांकि, भारत चीन से सीधे कच्चा माल नहीं मंगवा रहा है। बल्कि, बांग्लादेश, नेपाल, वियतनाम होते हुए कच्चा माल चीन से भारत आ रहा है। वहीं, दूसरी तरफ पिछले कुछ समय से चीन में कोरोना का कहर जारी है। झांसी केमिस्ट एसोसिएशन के सचिव नितिन मोदी ने बताया कि इन हालातों में दवाओं के कच्चे माल की ज्यादातर खपत वहीं हो रही है। भारत में दवा उत्पादकों को पर्याप्त मात्रा में खासकर एंटीबायोटिक और पेन किलर दवाओं का कच्चा माल बहुत कम मिल पा रहा है। इन हालातों में झांसी से दवाओं की जो मांग उत्पादकों को भेजी जा रही है। उसके सापेक्ष 50 फीसदी ही आपूर्ति हो पा रही है। ये दवाएं मिलने में भी तीन से चार गुना समय ज्यादा लग रहा है। उन्होंने बताया कि आगामी डेढ़-दो महीने में पेन किलर और एंटीबायोटिक दवाओं की कीमतों में 20 से 30 फीसदी का उछाल आ सकता है।
इनके दाम ज्यादा होने से नहीं कर पाते ज्यादा स्टॉक
बताया गया कि कोरोना काल में दवा उत्पादकों ने पैरासिटामोल के कच्चे माल का पर्याप्त मात्रा में स्टॉक कर लिया था। इसका कच्चा माल सस्ता होता है। वहीं, ज्यादातर एंटीबायोटिक और पेन किलर का कच्चा माल महंगा होता है। दूसरी तरफ, इनकी कालातीत (एक्सपायरी) होने की तिथि भी पैरासिटामोल समेत अन्य की तुलना में कम होती है। ऐसे में उत्पादक इनका बहुत अधिक स्टॉक नहीं रख पाते हैं।
अब चार से छह महीने में बढ़ रहीं कीमतें
झांसी केमिस्ट एसोसिएशन के सचिव ने बताया कि कोरोना के पहले कई वर्षों में दवाओं के कच्चा माल की कीमतों में इजाफा होता था। मगर अब हर चार से छह महीने में इसमें बढ़ोतरी हो रही है। आंकड़ों को देखें तो वर्ष 2022 में जुलाई में जहां पैरासिटामोल का कच्चा माल 520 रुपये किलो था, वो अक्तूबर बढ़कर 590 पहुंच गया। इसी तरह, एंटीबायोटिक सिप्रोफ्लोक्सासिन की कीमत 2275 से 2450, एजिथ्रोमाइसिन की 2650 से बढ़कर 3325, ओफ्लोक्सासिन 3100 से 3450, पेन किलर डायक्लोफेनिक सोडियम 550 से 645 रुपये प्रति किलो हो गया था। मौजूदा समय में इनके दामों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।