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Jhansi News: पहूज का सीना चीरकर छलनी कर डाला बालू माफिया ने

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अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। पहूज नदी ने हमें पीने के लिए पानी दिया और खेतों की सिंचाई की। लेकिन, इसके बदले में हमने इस जीवनदायिनी नदी को सिर्फ बदहाली दी। इसे हमने कचरे से भर दिया। नालों का गंदा पानी इसमें छोड़ दिया। और तो और नदी का सीना छलनी कर बड़े पैमाने पर बालू का अवैध रूप से दोहन किया, जिससे इसकी जलधारा भी विकृत हो गई।
मध्य प्रदेश की सीमाओं से सटे गजगांव से पहूज नदी छोटी-छोटी जलधाराओं को समेटकर आगे बढ़ती है। जालौन स्थित पांच नदियों के संगम पचनदा में पहुंचते-पहुंचते यह नदी विशाल रूप धारण कर लेती है। अन्य नदियों की तरह पहूज भी प्राकृतिक रूप से अपने साथ बालू समेटकर आगे बढ़ती है। लेकिन, नदी की यही खनिज संपदा इसके अस्तित्व के लिए संकट पैदा कर रही है।
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जगह-जगह इस नदी से बड़े पैमाने पर बालू निकाली जा रही है। खासतौर पर मध्य प्रदेश के उनाव में रात के अंधेरे में बालू माफिया लगातार नदी का सीना चीर रहे हैं। हालात यह हैं कि बालू के असीमित दोहन की वजह से नदी की प्राकृतिक धारा का स्वरूप भी बिगड़ गया है। उनाव से आगे बढ़ने पर नदी मार्ग में कहीं गहरे गड्ढे तो कहीं छोटे-छोटे टापू नजर आते हैं। बावजूद, जिम्मेदारों की ओर से जीवनदायिनी को बचाने की दिशा में कदम नहीं उठाए गए।
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यह बोले पाठक...
- पहूज नदी की किसी ने भी देखरेख नहीं की। जलकुंभी से पूरी नदी पटी पड़ी है। नालों का गंदा पानी बेधड़क इसमें गिर रहा है। इसके संरक्षण के गंभीर उपाय किए जाने चाहिए। - मो. आतिफ इमरोज, मोहनी बाबा
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- लोग नदी में कचरा न फेंक पाएं, इसके लिए आवास-विकास से आगे पुल पर दोनों ओर ऊंचे-ऊंचे जाल लगे हुए हैं। बावजूद, लोग हवा में पॉलिथीन उछालकर कचरा नदी में फेंक देते हैं। - ऊषा लिटौरिया, सीपरी बाजार
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- नदी के संरक्षण के लिए सरकार और समाज सभी को दृढ़ संकल्प के साथ आगे आना चाहिए। भारतीय संस्कृति में नदियों को मां के समान सम्मान दिया जाता है। इसी भाव के साथ एकजुट होकर नदी का पुनरुद्धार किया जाना चाहिए। - अवधेश गुप्ता, द्वारिका कॉलोनी
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- देश और प्रदेश में बुंदेलखंड की पहचान सूखाग्रस्त इलाके के रूप में होती है। बावजूद, हम पहूज नदी जैसे प्राकृतिक जल स्रोत का संरक्षण नहीं कर रहे हैं। जबकि, यह नदी क्षेत्र के जल संकट को दूर करने की क्षमता रखती है। - सुनील गुप्ता, नरसिंह राव टौरिया
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फोटो
आबादी वाले क्षेत्रोंं में आते ही नदी दुर्दशाग्रस्त हो जाती है। इससे साफ जाहिर है कि हमारे समाज ने ही पहूज को इस दशा में पहुंचाया है। अब हम सभी को इसके पुनरुद्धार के लिए आगे आना होगा। केवल सरकारी प्रयासों से नदी को नया जीवन नहीं दिया जा सकता।
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- उदय रापजूत, पूर्व अध्यक्ष-जिला अधिवक्ता संघ
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मानसून का आधा सीजन गुजर चुका है और झांसी में बारिश के नाम पर सिर्फ बूंदाबांदी ही हुई है। हर साल की कमोबेश यही कहानी है। बावजूद, हम पहूज नदी जैसे प्राकृतिक जल स्रोत का रखरखाव नहीं कर पाए। लेकिन, अब सभी को इसके लिए आगे आना चाहिए।
- आनंद अग्रवाल, अध्यक्ष-संस्था अग्रवाल रॉयल्स
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