अलीगोल में बुधवार को अमर उजाला के ‘बेटी ही बचाएगी’ अभियान के तहत बेसिक
शिक्षा विभाग के सहयोग से घर-घर जाकर बेटियों को शिक्षा की मुख्य धारा में
शामिल होने के लिए प्रेरित किया। वहीं आउट ऑफ स्कूल रहे बच्चों क ा
प्राथमिक विद्यालय अलीगोल में नामांकन कराया।
अभियान का शुभारंभ
प्राथमिक विद्यालय अलीगोल से हुआ, जिसमें विद्यालय के विद्यार्थी बैनर एवं
तख्तियां लेकर घर-घर जले शिक्षा का दीप, घर-घर विद्या दीप जलाओ, शिक्षा का
उजियारा फैलाओ आदि नारे लगा रहे थे। विद्यालय प्रबंधक समिति के अध्यक्ष
जमील, नूरी, तबस्सुम, अमीना, सुल्तान, नसरीन, शाहजहां, शब्बो, एबीआरसी
चौधरी धमेंद्र, प्रधानाध्यापक मोहम्मद अफजल, सहायक शिक्षिका सायरा बानो ने
विभाग के नामांकन पखवाड़ा व प्रवेश उत्सव के तहत बुलावा टोलियां बनाकर अमर
उजाला की टीम के साथ बस्ती के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर लोगों को
प्रेरित किया। बुलावा टोलियों में शामिल बच्चों ने सलीम बाग, खंती, अलीगोल
खिड़की बाहर की बस्तियों में रह रहे लोगों से बच्चों को विद्यालय भेजने का
अनुरोध किया। भ्रमण अवसर पर अभिभावकों को न सिर्फ बेटियों को स्कू ल भेजने
के लिए प्रोत्साहित किया गया, बल्कि उन्हें अनिवार्य शिक्षा अधिनियम, बाल
अधिकार की जानकारियां दीं। टोलियां उन घरों में भी गईं, जिनके बच्चे
विद्यालय में नामांकन के बाद भी स्कूल नहीं जा रहे थे। इस दौरान अधिकांश
परिवारों ने अपने बच्चों विशेषकर बालिकाओं को स्कूल भेजने का संकल्प लिया।
रोटी के लिए बीड़ी बना रही बेटियां
झांसी।
जनपद की पिछड़ी बस्ती में शुमार अलीगोल में गरीबी कई परिवारों में पांव
फैलाए हुए है। बीड़ी, अगरबत्ती, होटलों में रोटी आदि बनाने वाले कई परिवार
कठिन आर्थिक हालातों एवं सरकारी सुविधाओं की जानकारी न होने से अपने बच्चों
को स्कूल नहीं भेज पा रहे हैं। इन परिवारों में बेटियां भी कामों में हाथ
बंटाकर अपने लिए रोटी का इंतजाम करती हैं। हालांकि, जिन बच्चों ने शिक्षा
पाने का प्रयास किया, उन्हें स्कूल की बढ़ती फीस ने घर का रास्ता दिखा
दिया।
अभियान के दौरान अमर उजाला टीम से बातचीत में बस्ती में फहमीना
ने बताया कि उनकी दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी शमीम इंटर पास है और छोटी बेटी
जुबैदा हाईस्कूल पास है। दोनों आगे पढ़ना चाहती हैं, लेकिन महंगी फीस की
व्यवस्था न होने से उनकी बच्चियों को बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। उन्हें
पिछली कक्षाओं में वजीफा भी नहीं मिला।
बस्ती में रहने वाली गुड़िया
जिनक ी दो बेटियां एवं एक बेटा है। गरीबी के कारण उनके बच्चे अब तक स्कूली
शिक्षा से वंचित हैं। उनके मुताबिक स्कूल की फीस सहित अन्य व्यवस्थाएं न
होने पर उनके बच्चों का विद्यालयों में प्रवेश नहीं हो सका, लेकिन आज
उन्हें पता चला कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई, किताबें, ड्रेस नि:शुल्क
मिलती हैं।
पांच बेटियों की मां राहमीन ने बताया कि आर्थिक तंगी के चलते
उनकी बेटियों की पढ़ाई अधूरी रह गई। बच्चियों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी
बीड़ी बनाकर उठानी पड़ती है। अभियान के दौरान बस्ती में रहने वाली शबनम
जिनक ी दो बेटियां व एक बेटा है। वह कहती हैं कि गरीबी के चलते उनके बच्चे
शिक्षा से दूर हैं। उन्हें नहीं पता था कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा
नि:शुल्क मिलती है, लेकिन वह अब अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएंगी।
नौ बच्चों को दिलाया ऑन स्पॉट प्रवेश
अमर
उजाला क ी बेटी ही बचाएगी अभियान एवं बेसिक शिक्षा विभाग के नामांकन
पखवाड़ा व प्रवेश उत्सव क ो लेकर प्रथम दिवस अभिभावकों में खासा उत्साह
दिखा। अब तक शिक्षा से वंचित रहे नौ बच्चों का मौके पर ही प्राथमिक
विद्यालय अलीगोल में प्रवेश कराया गया। चार से 10 वर्ष की आयु तक के इनमें
बालिका महक, फरीन, स्नेहा अक्शा व इकरा हैं, तो बालक अनस, अतीक, तौफीक व
जाहिद हैं।