झांसी। कोरोना काल में लोगों की सेहत के साथ बड़े खिलवाड़ का भंडाफोड़ हुआ है। कोविड में कई लोगों ने सैनिटाइजर के नाम पर पानी का इस्तेमाल किया। औषधि प्रशासन विभाग द्वारा लिए गए नमूने में यह खुलासा हुआ है। अब आरोपी के खिलाफ न्यायालय में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
कोरोना काल में नकली सैनिटाइजर बेचकर लोगों के साथ खूब ठगी की गई। पिछले साल कोरोना की दस्तक के साथ ही मास्क और सैनिटाइजर का कारोबार खूब फला-फूला। इसी आपदा को कुछ लोगों ने कमाई का अवसर बना लिया, वो भी दूसरों की जान जोखिम में डालकर। दरअसल, औषधि प्रशासन विभाग ने अप्रैल 2020 में न्यू रोड स्थित दवा विक्रेता की दुकान पर छापेमारी की थी। इस दौरान सैनिटाइजर का नमूना लेकर जांच के लिए आगरा की प्रयोगशाला भेज दिया था। साथ ही डेढ़ लाख रुपये का माल भी सीज कर दिया। हाल ही में आई जांच रिपोर्ट में यह सैनिटाइजर नकली पाया गया है। औषधि निरीक्षक उमेश भारती ने बताया कि सैनिटाइजर में आइसोप्रोपाइल एल्कोहल या प्रोपेनॉल होना चाहिए। जांच के दौरान नमूने में यह दोनों ही नहीं मिले। पानी में नीला रंग मिलाकर सैनिटाइजर के नाम से बेचा जा रहा था। अब मेसर्स यूनिक मेडिकेयर प्रोडक्ट्स आगरा और जमाल सिद्दीकी के खिलाफ विशेष न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के यहां मुकदमा दर्ज कराया गया है। औषधि निरीक्षक ने बताया आरोपी पर बिना लाइसेंस नकली सैनिटाइजर बेचने समेत अन्य धाराएं लगी हैं। आरोपों की पुष्टि होने पर दस साल से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।