गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन खत्म होने से हुई मौतों के बाद प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाने का फैसला लिया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन को टेंडर निकालने के निर्देश दिए हैं।
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगस्त में 50 बच्चों समेत 60 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इसकी वजह ऑक्सीजन खत्म हो जाना बताया गया। इसके बाद प्रदेश सरकार ने पहली बार ऑक्सीजन गैस के लिए अलग से मेडिकल कॉलेजों को बजट जारी किया। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज को 30 लाख रुपये ऑक्सीजन के लिए दिए गए। अब सरकार ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाने का फैसला लिया है। मेडिकल कालेजों से जुड़े अस्पतालों में पाइप लाइन के जरिए ऑक्सीजन सप्लाई की जाएगी। हाल ही में लखनऊ में बैठक के दौरान चिकित्सा शिक्षा विभाग के अफसरों ने मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों को अपने-अपने परिसर लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगवाने के निर्देश दिए। देश में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाने वाली तीन ही कंपनियां हैं। प्लांटों से ऑक्सीजन पाइप लाइनों से जोड़ा जाएगा। इसके बाद सीधे वार्ड, इमरजेंसी, आईसीयू में ऑक्सीजन की सप्लाई होगी।
कम लागत
जानकारों ने बताया कि लिक्विड ऑक्सीजन से ही गैस ऑक्सीजन तैयार की जाती है। फिर प्लांट से सिलेंडर भरकर अस्पतालों में सप्लाई होते हैं। इसलिए सिलेंडर गैस वाले ऑक्सीजन की तुलना में लिक्विड ऑक्सीजन की लागत कम होती है।
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ये होगा फायदा
गैस के ऑक्सीजन सिलेंडर छोटे होते हैं, जो कि दो दिन में खत्म हो जाते हैं। लिक्विड ऑक्सीजन का प्लांट लगने से 15 से 20 दिन तक ऑक्सीजन की कमी का झंझट नहीं रहेगा। आईसीयू, इमरजेंसी में ऑक्सीजन की खपत ज्यादा होती है।
सरकार से लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाने की अनुमति मिल गई है। इसका प्लांट काफी बड़ा होगा, इसलिए एक बार में ऑक्सीजन भर जाने से 15-20 दिनों तक सप्लाई होती रहेगी। प्लांट में मीटर भी लगेगा, जिससे ऑक्सीजन की उपलब्धता का पता चलता रहेगा। मरीजों को ऑक्सीजन की आपूर्ति गैस पाइप लाइन द्वारा ही की जाएगी। एक-दो दिन में टेंडर निकाले जाएंगे।
- डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज।