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ताकि न टूटे किसी की सांसों की डोर

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झांसी। कोरोना काल में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए दौड़ रहीं ऑक्सीजन एक्सप्रेस के संचालन में झांसी मंडल के रेल कर्मियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। चालक और गार्ड दल ने कोविड संक्रमण की चुनौतियों का सामना करते हुए विभिन्न राज्यों में ऑक्सीजन एक्सप्रेस पहुंचाई। ऑक्सीजन एक्सप्रेस दौड़ाने वाले कर्मचारी खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
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ऑक्सीजन के परिवहन हेतु भारतीय रेल द्वारा लगातार ऑक्सीजन एक्सप्रेस चलाई जा रही है। यह एक्सप्रेस 55 किमी प्रति घंटे की गति से चल रही है। एक्सप्रेस को ग्रीन कॉरिडोर से जोड़ दिया गया है। झांसी मंडल में कार्यरत गार्ड प्रशांत मिश्र ने छह मई को ऑक्सीजन एक्सप्रेस का संचालन झांसी से आगरा के बीच किया था। वे कहते हैं कि एक्सप्रेस संचालन से वह सीधे उन मरीजों की मदद कर पा रहे हैं, जिनकी सांसे थमने को हैं। इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है। वह धन्य हैं, जो रेलवे ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है।
संजीव कुशवाहा कहते हैं कि ऑक्सीजन एक्सप्रेस के संचालन हेतु उन्हें लगातार ग्रीन सिग्नल मिले, जिससे कि वो ट्रेन के माध्यम से जीवन रक्षक ऑक्सीजन को जल्द से जल्द अपने गंतव्य स्टेशन तक पहुंचाने में सफ ल रहे। जेके सिंह का कहना है कि ऑक्सीजन लेकर जा रही इस मालगाड़ी को रास्ते में ग्रीन कॉरीडोर के तहत प्रत्येक रेलवे स्टेशन पर ग्रीन सिग्नल मिला और कहीं भी डिटेंशन नहीं किया गया। राउरकेला से फरीदाबाद गई ऑक्सीजन एक्सप्रेस में बतौर गार्ड तैनात प्रदीप तिवारी और प्रदीप लोधी का कहना है कि हम देश की आजादी हेतु किये गए महा आंदोलन में तो शामिल नहीं हुए, परंतु हमें गर्व है कि इस ऑक्सीजन एक्सप्रेस के संचालन के माध्यम से विपरीत परिस्थितियों में अपने राष्ट्र की सेवा कर पा रहे हैं। लोको पायलट ब्रजेश पांडेय और सहायक लोको पायलट चेतन अग्रवाल कहते हैं कि उनको अंदरूनी रूप से रेल सेवा के साथ-साथ सच्ची देश सेवा की अनुभूति हो रही है।
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