झांसी। सरकारी अस्पताल में भी गर्भवती महिलाओं को इलाज करना महंगा पड़ रहा है। जिला महिला अस्पताल के चिकित्सकों की मनमानी के कारण अस्पताल में इलाज कराने के लिए आने वाली गर्भवती महिलाएं बाहर से दवाइयां लेने को मजबूर हैं। महिलाओं का कहना है कि अक्सर एक-दो दवा ही अस्पताल से मिल पाती है, बाकी बाहर से खरीदनी पड़ती है।
जिला महिला अस्पताल में जिले भर से रोजाना 300 से अधिक गर्भवती महिलाएं इलाज कराने के आती हैं। चिकित्सक के परामर्श के बाद महिलाओं को दवाई दी जाती हैं। लेकिन चिकित्सक बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। जिसके चलते गर्भवती महिलाओं को बाहर से दवाई लेना पड़ रही है। जबकि अस्पताल के दवा काउंटर पर 43 किस्म की दवाइयां, 5 तरह के ड्रॉप, 17 प्रकार के सिरप, आठ तरह के ट्यूब एवं 10 किस्म के इंजेक्शन होने का नोटिस चस्पा किया गया है। लेकिन चिकित्सकों की मनमानी का खामियाजा गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन से कई बार शिकायतें करने के बाद भी कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है।
तालपुरा निवासी महिला कमला ने पर्चा दिखाते हुए बताया कि दवा अस्पताल से नहीं मिली, डॉक्टर ने बाहर की दवा लिखी है। मोहल्ला दरीगरान निवासी अनीता देवी ने बताया कि गर्भवती होने के बाद तीन बार आ चुकी हैं लेकिन हर बार डॉक्टर ने बाहर की दवा लिखी। खैलार निवासी अंशु ने बताया कि पर्चा दिखाकर बोला कि अस्पताल से सिर्फ एक दवा मिली है, बाकी दवाइयां डॉक्टर ने बाहर की लिखी हैं।
उधर, सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय बताया कि अस्पताल में सभी दवाएं हैं। चिकित्सकों को बाहर की दवाएं लिखने पर पाबंदी है। बाहर की दवाएं लिखने पर चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। मरीज या तीमारदार लिखित शिकायत दे सकते हैं।