our son cruel, mole mole should die
झांसी। दुष्कर्म मामले में आरोपी के खिलाफ गवाही देने में माता-पिता नहीं झिझके। कहा कि उनका बेटा दरिंदा है उसे जेल में तिल-तिल कर मरना चाहिए। इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने काफी सक्रियता दिखाई थी। पुलिस ने वारदात के महज 33 दिन में ही मामले में चार्जशीट लगाकर अदालत में दाखिल कर दी थी। इसके बाद न्यायालय में लगातार सुनवाई भी होने लगी। जिसका नतीजा यह रहा कि अभियुक्त को 45 दिन में सजा सुना दी गई। इसमें सबसे खास बात यह है कि अभियुक्त के पिता व मां समेत तीन लोगों ने भी गवाही दी, जो अभियुक्त को सजा दिलाने में अहम साबित हुई।
पीड़ित बच्ची पर दुखों का पहाड़ बचपन से ही टूट पड़ा था। मां व पिता का निधन हो जाने के बाद से ही बच्ची अपनी दादी के साथ रहने लगी। 23 अगस्त की दोपहर घर के अन्य सदस्य बाहर थे, तभी शराब के नशे में आरोपी दिनेश घर पहुंचा। बच्ची को अकेला पाकर दिनेश की नियत खराब हो गई। इसके बाद दुष्कर्म कर मौके से भाग निकला था। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली थी। तीन दिन में आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। इस घटना से आहत आरोपी के पिता व मां समेत तीन लोग मामले में गवाह भी बने। पुलिस ने 26 सितंबर को चार्जशीट लगाकर न्यायालय विशेष न्यायाधीश (पाक्सो) /अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या सात संजय कुमार सिंह की अदालत मेें चार्जशीट भेजी। पूरे प्रकरण की जांच गुरसराय थानाध्यक्ष लोकेंद्र त्रिपाठी ने की है।
चार्जशीट अदालत पहुंचते ही प्रकरण की सुनवाई तेजी के साथ होने लगी। सोमवार को अदालत ने आरोपी दिनेश को अभियुक्त मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। मुकदमे की संयुक्त पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) तेज सिंह गौर और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सूर्य प्रकाश पाठक ने की।