बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश जैविक प्रमाणीकरण संस्था के तत्वावधान में
‘झांसी में जैविक उत्पादन एवं प्रमाणीकरण’ विषयक गोष्ठी आयोजित की गई,
जिसमें किसानों से रासायनिक को त्याग जैविक खेती को अपनाने का आह्वान किया
गया। इसके लाभ भी समझाए गए।
पं. दीनदयाल उपाध्याय सभागार में आयोजित
गोष्ठी में मंडलायुक्त के राम मोहन राव ने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र की
मृदा बीमार है। इसके स्वास्थ्य लाभ के लिए जैविक खेती अपनानी होगी। इससे हम
भी स्वस्थ होंगे। अधिक लालच के चक्कर में इस्तेमाल में लाई गईं रासायनिक
खादों ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। लोग नई - नई बीमारियों से जकड़
रहे हैं। लेकिन, अब हमें खेती की पचास साल पुरानी विधि अपनानी होगी। हरी
खाद, गोबर की खाद व वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल करना होगा।
जैविक
प्रमाणीकरण संस्था के निदेशक डा. एम पी सिंह ने कहा कि किसान प्रमाणीकरण के
बाद अपने उत्पादन को कहीं भी बेच सकता है। इसका उसे लाभ मिलेगा। उन्होंने
कहा कि झांसी में जैविक प्रमाणीकरण कार्यालय भी खोला जाएगा। कृषि भवन लखनऊ
से आए एस आर कौशल ने बताया कि बुंदेलखंड के सातों जिलों में जैविक खेती के
लिए कलस्टर का चयन किया गया है। सीडीओ संजय कुमार ने कहा कि जैविक खेती के
लिए सरकार संवेदनशील है। बुंदेलखंड में इसे बढ़ावा दिया जाएगा। इस दौरान
उन्होंने किसानों से भी जैविक खेती के बारे में जानकारी ली। शिवकुमार ने
जैविक खेती व उपजवर्धक खाद की जानकारी दी। डा. आर एस चौधरी ने कहा कि किसान
अधिक से अधिक फसल अवशेष का उपयोग करें।
इस मौके पर जेडीए एस एस चौहान,
डीडी बीज प्रमाणीकरण पी सी वर्मा, डीडी कृषि डा. यू पी सिंह, डीडी ललितपुर
हंसराज, वैज्ञानिक वी के सिंह, निशी राय, डीओ डा. बी आर मौर्य, बीएसए के
के कटियार आदि मौजूद रहे।