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उफ ! ये मई जैसी गर्मी, बिजली की इत्ती खपत... दनादन हो रही कटौती, विभाग को भी लग रही चपत

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झांसी। अबकी साल मार्च में ही मई जैसी गर्मी लोगों को झुलसा रही है, ऐसे में घर-घर एसी-कूलर भी चल रहे लेकिन इससे बढ़ी बिजली की खपत से जहां ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो रहे हैं वहीं दनादन कटौती भी हो रही है। हालत यह है कि दिन भर बिजली की आवाजाही लोगों का पसीना निकाल रही है, जबकि बिजली विभाग को भी फाल्ट सुधारने में बड़ी चपत लग रही है। बिजली विभाग की मानें तो वैसे ही लोगों पर विभाग का करोड़ों रुपया बकाया पड़ा है।
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गर्मी शुरू होते ही जिले में बिजली की खपत दोगुनी बढ़ गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने की संभावना है। हाल ये है कि ओवरलोडिंग के कारण कई जगह ट्रांसफार्मर और जर्जर तार अभी से जवाब देने लगे हैं। फाल्टों को खोजने और उनके मरम्मत कराने के नाम पर घंटों कटौती होने लगी है। इससे लोगों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
महानगर में जर्जर तार और लाइनलॉस ने भी विभाग की समस्या बढ़ा दी है। बता दें, महानगर में दो वितरण खंडों में बिजली की आपूर्ति की जाती है। जिसमें नगरीय वितरण खंड प्रथम, नगरीय वितरण खंड द्तिीय हैं। इनमें 16 उपखंड़ों से क्षेत्र के घरों में बिजली पहुंचाई जाती है। जहां पिछले साल अप्रैल - मई में 50 - से 60 लाख यूनिट प्रति महीने की खपत होती थी। वहीं अभी फरवरी- मार्च में ही 50 से 60 लाख यूनिट प्रति महीने खर्च होने लगी है।
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47 करोड़ बिजली बिल बकाया, ट्रांसफार्मरों की मरम्मत में भी हो रहा खर्च
झांसी। जहां विभाग को ट्रांसफार्मर और जर्जर तारों की मरम्मत कराने के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। वहीं, विभाग का उपभोक्ताओं पर 47 करोड़ बकाया पड़ा हुआ है। ऐसे में इस गर्मी में जगह-जगह खराब हो रहे ट्रांसफार्मरों और फाल्टों को सुधारने में विभाग को बड़ी चपत लग रही है। विभाग की मानें तो ट्रांसफार्मर और जर्जर तारों की मरम्मत कराने में ही लाखों खर्च हो जाते हैं।
महानगर की ये है स्थिति
वर्ष 2021 खपत (प्रति यूनिट में)
फरवरी 2 करोड़ 80 लाख
मार्च 4 करोड़ 32 लाख
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वर्ष 2022 खपत (प्रति यूनिट में)
फरवरी 4 करोड़ 40 लाख
मार्च 5 करोड़ 50 लाख
पिछले साल बिजली की जो खपत अप्रैल मई में होती थी। वही, अबकी बार गर्मी ज्यादा बढ़ने से फरवरी-मार्च के महीने में होने लगी है। पिछले साल के मुकाबले इस साल काफी अधिक बिजली की खपत हो रही है। - डी. यादवेंदु- नगरीय वितरण खंड, प्रथम
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