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श्रद्धा, दर्शन और ज्ञान से ही भवसागर से मिलेगी मुक्ति: सृष्टिभूषण

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अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर। जिनधर्म प्रभाविका आर्यिका सृष्टिभूषण माता ने कहा कि संसार से मुक्ति तभी मिलेगी जब आप उनके बताए मार्ग पर चलेंगे। सभी मौत के मेहमान हैं, भगवान भागने से नहीं जागने से, उनकी राह पर चलने से मिलते हैं। वह सोमवार को जैन अटा मंदिर में धर्मसभा को संबोधित कर रही थीं।
आर्यिका श्री ने कहा कि जैसा आप बीज बोते हो, वैसा फल मिलेगा। त्योहार आने पर आप घर की सफाई करते हैं, इसी प्रकार आपको मन की सफाई करनी चाहिए, तभी भगवान का निर्वाण मोक्ष कल्याण बनाना सार्थक होगा। राम, रावण, कृष्ण और कंस के नाम राशि एक थी, किंतु उनकी मति अलग होने के कारण उनकी गति वैसी प्राप्त हुई। हाथी, सिंह, मरीचि की पर्याय से सभी प्राणी तीर्थंकर बने हैं। उन्होंने कहा, इस संसार रूपी समुद्र से पार होने के लिए सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र ही सहारा है। इस संसार में डूबने के लिए मिथ्या दर्शन, मिथ्या ज्ञान और मिथ्या चरित्र कारण है। श्रद्धा दर्शन ज्ञान और चरित्र के माध्यम से ही आप संसार से पार हो सकते हैं।
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धर्मसभा का शुभारंभ आचार्य विद्यासागर महाराज एवं आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मतिसागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर श्रेष्ठीजनों ने किया। मंगलाचरण अनीता मोदी ने गुरुवंदना कर किया। धर्मसभा में आर्यिका विजज्ञस्सा एवं आर्यिका विश्वयश मति माता के साथ ब्रह्मचारिणी रूवी विराजमान रहीं। इस दौरान समाज श्रेष्ठी शीलचंद, अखिलेश, मनोज जैन, अक्षय अलया, डॉ. सुनील जैन संचय, डॉ. राकेश जैन, धन्यकुमार जैन, मोनू जैन, शिक्षक पुष्पेंद्र जैन, अमित जैन सराफ आदि मौजूद रहे।

धर्म ही जीवन में सुख का कारण: मनोहर लाल
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट जयपुर के तत्वावधान में शिक्षण प्रशिक्षण शिविर में राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ ने जिनवाणी को नमन किया और कहा कि धर्म ही जीवन में सुख का कारण है।
स्याद्वाद बाल संस्कार केंद्र एवं वर्णी कान्वेंट स्कूल में इन दिनों दिगंबर जैन स्वाध्याय मंडल एवं अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन के तत्वावधान में विद्वानों का शिविर चल रहा है। विभिन्न प्रान्तों के शिविरार्थियों का विद्वान मार्गदर्शन कर रहे हैं। राज्यमंत्री सायंकाल धार्मिक शिविर में पहुंचे, जहां आयोजन समिति के अध्यक्ष मुन्नालाल जैन, महामंत्री सुरेश जैन, अनूप नजा, अखिलेश चौधरी, शिखर चंद, विवेक जैन, सुशांत जैन, सीमांत लोहिया ने उन्हें सम्मानित किया।
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धर्मसभा में पं. परमात्म प्रकाश भारिल्ल ने बताया, ज्ञान कला घट-घट में बसती है। यह ज्ञान कला हमारे अंदर अनादि से है पर हम अपनी प्रभुता को पहचान नहीं पा रहे और दुखी रहते हैं। इस दौरान अजय जैन, अक्षय अलया, दीपक सिंघई, पुष्पेंद्र जैन, संजीव सौरया आदि मौजूद रहे।
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