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कोरोना ने एक परिवार के सात लोगों को छीना, एक ही दिन में जलीं तीन चिताएं

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कोरोना से एक परिवार के मरे चार लोगों की खबर में--------चतुर्भुजराय अपनी पत्नी श्रीमती रामश्री राय।
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झांसी। कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने कई परिवार उजाड़े हैं। कई घरों में तो इस कदर तबाही मचाई कि मौतों का सिलसिला थमा ही नहीं। ऐसा ही एक परिवार है सर्वनगर में रहने वाला राय परिवार। इस परिवार में एक के बाद एक सात लोगों की मौत हो गई। दस दिनों तक परिजनों के आंसू रुके नहीं। हाल ये रहा कि एक-एक दिन में तीन चिताएं जलीं। हंसता-खेलता ये परिवार अब पूरी तरह टूट चुका है।
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सर्व नगर कॉलोनी निवासी जनरल स्टोर संचालक जय प्रकाश राय ने अपने सात परिजनों को इस महामारी में खो दिया। जयप्रकाश के पत्र अंकित राय ने बताया कि तीन अप्रैल को उनके पिता को बुखार आना शुरू हुआ। छह को जांच कराई तो कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आई। फिर परिवार के अन्य सदस्यों को भी बुखार आना शुरू। 11 अप्रैल को सभी की जांच कराई। इसमें छह में से पांच सदस्य पॉजिटिव आ गए। इलाज के दौरान 18 अप्रैल को अंकित की दो दादियां रामकुमारी राय, प्रेमवती राय की चंद घंटों के अंतराल में मौत हो गई। घर के नजदीक रहने वाले फूफा सतीश राय ने भी उसी दिन रात में दम तोड़ दिया। अंकित ने बताया कि 24 अप्रैल को पहले मां हेमलता राय, फिर दादा किशनलाल राय और रात में मामा मनोज राय की कोरोना के चलते जान चली गई। 28 को चाचा राम प्रकाश की भी मौत हो गई। 10 दिनों के अंदर परिवार के सात लोगों के जाने से राय परिवार बुरी तरह टूट गया। हाल ये रहा कि कई दिनों तक आंसुओं का सिलसिला रुका नहीं। अभी भी परिवार सदमे में है। अभी भी परिजनों को लगता है जैसे वो कोई बुरा सपना देख रहे हैं। यकीन ही नहीं होता है कि परिवार के सात लोग उनसे दूर हो गए।
दिनभर एक से दूसरे अस्पताल दौड़ता रहा अंकित
कोरोना संक्रमित होने के बाद कोई परिजन मेडिकल कॉलेज तो कोई जिला अस्पताल में भर्ती था। अंकित घर का बना खाना परिजनों को देने अस्पताल जाता था। दिनभर वो एक से दूसरे अस्पताल की भागदौड़ करता रहा। इस दौरान उसे भी कोरोना के लक्षण आ गए। हालांकि, दवाएं खाने के बाद वो ठीक हो गया। अब वो दुकान की जिम्मेदारी संभाल रहा है।
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चार अपनों को खो दिया, अब एक के लिए कर रहे दुआ
- छनियापुरा निवासी हरिकिशन के परिवार को भी गहरे जख्म दे गया कोरोना
झांसी। छनियापुरा निवासी व्यापारी हरिकिशन राय के परिवार को भी कोरोना गहरे जख्म दे गया। इस महामारी में उन्होंने चार अपनों को खो दिया। अब एक चचेरा भाई भी रायपुर में भर्ती है। वो भी जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहा है। सभी परिजन ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि बस उसको ठीक करके वापस घर लौटा दें।
हरिकिशन ने बताया कि सवा महीने में ही उनके परिवार के चार लोग कोरोना संक्रमित होने के बाद चल बसे। इसमें उनके चाचा चतुर्भुज राय, चाची रामश्री राय, चचेरे भाई विजय और चचेरी बहन भारती शामिल हैं। लगातार हुईं चार मौतों ने पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया है। हरिकिशन और उनकी पत्नी काजल सभी परिजनों की सेवा में दिनरात जुटे रहे। हरिकिशन ने बताया कि अप्रैल में सिविल लाइन निवासी उनके चाचा-चाची और चचेरे भाई विजय कोरोना संक्रमित हो गए। सभी को अस्पतालों में भर्ती कर इलाज शुरू कराया गया। 20 को सबसे पहले विजय ने दम तोड़ दिया। इसके अगले ही विजय के पिता की भी मौत हो गई। इसी बीच भोपाल में रह रहीं विजय की बहन भारती भी झांसी आ गईं। वो भी कोरोना की चपेट में आ गईं। उन्हें भी परिजनों ने अस्पताल में भर्ती कराया। 19 मई को उपचार के दौरान भारती की भी मौत हो गई। ठीक आठ दिनों बाद भारती की मां भी चल बसीं। अब एक चचेरे भाई अजय जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे हैं। रायपुर में उनकी ससुराल होने की वजह से वो वहीं पर भर्ती हैं। पूरा परिवार उनके लिए ईश्वर से स्वस्थ होने की प्रार्थना करने में दिन-रात जुटा हुआ है।
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