महानगर की सात ट्रांसपोर्ट कंपनियां वाणिज्य कर विभाग के निशाने पर हैं। वाणिज्य कर अफसरों को शक है कि ये ट्रांसपोर्ट कंपनियां महानगर में टैक्स चोरी का माल लाने का काम करती हैं। एक जून से चलाए जा रहे अभियान में 21 गाड़ियों में टैक्स चोरी का माल पकड़ा जा चुका है।
शासन ने वाणिज्य कर अफसरों से महानगर में संगठित होकर टैक्स चोरी करने वाले कारोबारियों की सूची मांगी थी, जिस पर सात ट्रांसपोर्टरों के अलावा एक तेल, धनिया, सुपारी और गुटखा माफियाओं के नाम भेजे गए थे। शासन ने निर्देश जारी किए है कि किसी भी हाल में टैक्स चोरी नहीं होनी चाहिए। जिन टैक्स चोरी कारोबारियों के नाम भेजे गए हैं, उनकी गाड़ियों पर सख्त नजर रखी जाए।
ज्वाइंट कमिश्नर (प्रवर्तन) रमेश चंद्र राजपूत के नेतृत्व में एक जून से अब तक चले अभियान में टैक्स चोरी की 21 गाड़ियां पकड़ी गई हैं। इनमें सबसे अधिक परचून, सोया रिफाइंड तेल, सुपारी, हौजरी से लदी गाड़ियां थीं। 21 गाड़ियों में करीब 50 लाख का माल पकड़ा गया, जिसमें अभी दस गाड़ियों में 21.04 लाख शमन शुल्क जमा कराया जा चुका है।
‘ किसी भी हाल में टैक्स चोरी नहीं होने दी जाएगी। उनके अफसर लगातार सड़क पर रहकर अवैध कारोबारियों की गाड़ियों पर नजर रखे हैं।’
डीएस तिवारी, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन।
इन गाड़ियों में पकड़ा ज्यादा माल
एक जून को भांडेर रोड से एक गाड़ी सुपारी लेकर झांसी आने की सूचना थी, लेकिन सूचना लीक होने पर चालक गाड़ी को उरई की तरफ ले गया। इसके बाद भी गाड़ी को पकड़ लिया गया। गाड़ी में 21 लाख की सुपारी थी, जिस पर आठ लाख शमन शुल्क जमा कराया गया। इसी तरह सुभाष गंज आ रही एक रिफाइंड तेल की गाड़ी को जेल के सामने पकड़ा गया। इस गाड़ी पर चार लाख रुपये शमन शुल्क जमा कराया गया। भांडेर से हौजरी का सामान लेकर आ रही एक गाड़ी को चिरगांव में पकड़ा गया। इस गाड़ी पर 1.40 लाख शमन शुल्क जमा कराया गया।
अप्रैल में 29 और मई में 14 गाड़ियां पकड़ी
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही टैक्स चोरी का माल पकड़ने में तेजी आई है। विभाग ने झांसी के आसपास अप्रैल माह में 29 और मई में 14 गाड़ियां टैक्स चोरी के माल के साथ पकड़ी। इन गाड़ियों पर करीब 30 लाख शमन शुल्क जमा कराया गया।
टैक्स चोरी के माल तक नहीं पहुंच पा रहे सचल दल
वाणिज्य कर कार्यालय में पांच सचल दल हैं, इनमें दो सचल दलों में सहायक कमिश्नर तैनात हैं। जबकि तीन सचल दल का काम सेक्टर के अधिकारी देख रहे हैं। पिछले लंबे समय से सचल दल के अधिकारी महानगर आने वाली टैक्स चोरी का माल नहीं पकड़ सके हैं। बताया गया है कि सचल दल अधिकारियों के सड़क पर निकलते ही अवैध कारोबारियों तक सूचना पहुंच जाती हैं और वे उस वक्त तक गाड़ी नहीं निकालते, जब तक कि अफसर सड़क से हट न जाए।