झांसी। पहनावा किसी सर्वोदयी नेता जैसा, बातें किसी किंवदंती की कथाओं जैसी। फिर भी एक यथार्थ उद्देश्य के साथ भारतीय ग्रामीण क्रिकेट लीग (आईजीसीएल) के चेयरमैन डॉ. अनुराग भदौरिया अपने ब्रांड के साथ बुंदेलखंड की नब्ज टटोलने आए हैं, जिनका आईपीएल की तर्ज पर आईजीसीएल को स्थापित करने का सपना है। प्रदेश के दो दर्जन से अधिक जिलों में इस टूर्नामेंट का आयोजन कराकर आईजीसीएल के चेयरमैन ने सोमवार को अमर उजाला से खास बातचीत कर अपनी दिल की बात साझा की।
कॉरपोरेट जगत की दो करोड़ रुपये सालाना की नौकरी छोड़ने वाले डॉ. भदौरिया ने वर्ष 2009 में लखनऊ के मोहनलालगंज के एक बेहद पिछड़े गांव मीसां से ग्रामीण क्रिकेट लीग की नींव रखी थी। उन्होंने बताया कि किसी भी नेता ने लीग के उद्घाटन व समापन में अतिथि बनने की स्वीकृति नहीं दी। तब उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, जो उस वक्त सांसद थे को आमंत्रण भेजा। बक्शी की तालाब क्षेत्र में चल रहे टूर्नामेंट में वह आए और तब से लगातार मुख्यमंत्री द्वारा सहयोग दिया जा रहा है। डॉ. भदौरिया कहते हैं कि मेरे पास आईपीएल जैसी बड़ी विरासत तो नहीं लेकिन, ग्रामीण आंचल के उन हजारों युवाओं के सपने जगाए हैं, जो दूधिया रोशनी और थिरकते बॉलीवुड सितारों के बीच अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाकर लाखों के नकद पुरस्कार जीतें। आईजीसीएल के चेयरमैन ने बताया कि पश्चिम बंगाल और हरियाणा में भी इसकी शुरूआत हो चुकी है। अब बुंदेलखंड का रुख किया गया है। टूर्नामेंट में झांसी, ग्वालियर, दतिया और टीकमगढ़ के ग्रामों की टीमें भी हिस्सा ले रहीं हैं।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री आईजीसीएल का अघोषित व अनिवार्य हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने डॉ. अनुराग को राज्यमंत्री का दर्जा देते हुए खेल विभाग का प्रमुख सलाहकार बना दिया है। इन सबके बावजूद वह बिना किसी लाव-लश्कर के चलते हैं और सामान्य जीवन जीते हैं। वे कहते हैं कि गांव की मिट्टी में जनम लिया है, इन्हीं गांव वालों को कॉरपोरेट तक पहुंचाने के लिए त्याग कर रहा हूं। इतना तो तय है कि दुधिया रोशनी में बॉलीवुड की थिरकन के बीच भले ही आईपीएल न देख पाए हों किंतु, आने वाले दिनों में झांसी के लोग आईजीसीएल के चौकों-छक्कों में यह सब जरूर देख पाएंगे।